लंदन में हिन्दी महोत्सव 2018 का समापन

Hindi-Festival-2018-3
लंदन|
 
 
अदिति माहेश्वरी-गोयल (निदेशक वाणी प्रकाशन)
 
पहला दिन : ऑक्सफोर्ड
 
ऑक्सफोर्ड। लंदन। बर्मिंघम। 'हिन्दी महोत्सव' का चौथा अध्याय और के पहले अध्याय का उद्घाटन 28 जून 2018 को में किया गया।
 
वाणी फाउंडेशन, यूके हिन्दी समिति, 'वातायन' और कृति यूके के संयुक्त तत्त्वावधान में 3 बड़े नगरों- ऑक्सफोर्ड, लंदन, में भव्य हिन्दी महोत्सव संपन्न हुआ। उत्सव का उद्घाटन दुनिया की अकादमिक राजधानी ऑक्सफोर्ड शहर में आयोजित हुआ।
 
ऑक्सफोर्ड बिजनेस कॉलेज की प्रधानाचार्य जेरी ताकामुरा ने उत्सव के सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में हर वर्ष सैकड़ों भारतीय शब्दों के शामिल होने से भारतीय भाषाओं के विश्व में प्रचलित होने पर हर्ष व्यक्त किया। दिल्ली की चिन्मयी त्रिपाठी ने महादेवी वर्मा, निराला और अन्य भारतीय गीतकारों की रचनाओं की सुन्दर प्रस्तुति की।
 
कार्यक्रम के उद्घाटन संबोधन में वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक और के अध्यक्ष अरुण माहेश्वरी ने कहा कि 12 से अधिक देशों से आए हिन्दीकर्मियों का ऑक्सफोर्ड में मिलना अभूतपूर्व घटना है और हिन्दी भाषा की विजय है।
 
उत्सव के संयोजक डॉ. पद्मेश गुप्त ने पूरे उत्सव की रूपरेखा बताते हुए कहा कि हिन्दी साहित्य के वैश्वीकरण में प्रवासी लेखकों का महत्वपूर्ण योगदान है। यह महोत्सव हिन्दी भाषा, साहित्य और शिक्षण तथा भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से संपन्न हो रहा है। इस महोत्सव के माध्यम से हमारा प्रयास है कि हम भाषा और संस्कृति के विद्वानों और प्रतिष्ठित कलाकारों को हिन्दी के विद्यार्थियों और युवाओं से जोड़ें।
 
उन्होंने कहा कि कुछ अकादमिक सत्रों में गंभीर चर्चा होगी, कवि सम्मेलन और काव्य गोष्ठियों के द्वारा जनमानस तक साहित्य को पहुंचाया जाएगा, कुछ हिन्दी और संस्कृत की विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा, पुस्तकों के विमोचन के साथ-साथ पुस्तक प्रदर्शनियों का आयोजन होगा, हिन्दी शिक्षण और साधन जैसे विषयों में हिन्दी शिक्षक और विद्यार्थियों के विचारों पर मंथन होगा और हिन्दी के छोटे-बड़े विद्यार्थियों के कविता पाठ के आयोजन होंगे।
 
आयोजन के प्रवासी लेखन सत्र में फिजी के अनिल शर्मा 'जोशी' की पुस्तक 'प्रवासी लेखन : नई जमीन नया आसमान' का लोकार्पण हुआ जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ लेखिका नीलिमा डालमिया आधार ने की तथा दिव्या माथुर और शिखा वार्ष्णेय ने पुस्तक पर विचार रखे।
 
उद्घाटन सत्र का कुशल संचालन करते हुए वाणी फाउंडेशन की मैनेजिंग ट्रस्टी अदिति माहेश्वरी-गोयल ने कहा कि आज ऐसा लग रहा है कि ऑक्सफोर्ड में प्रवासी लेखन ग्रेजुएट हो गया है। आयोजन का दूसरा सत्र हिन्दी साहित्य और सिनेमा पर हुआ। सत्र की अध्यक्षता की में साउथ एशियन सिनेमा के संस्थापक ललित मोहन जोशी ने और बातचीत की कुसुम अंसल, यतीन्द्र मिश्र तथा फिल्म निर्देशक अजय जैन ने। उद्घाटन समारोह में इंग्लैंड और भारत के अलावा ऑक्सफोर्ड के अनेक देशों के प्रतिनिधियों और विद्वानों ने भाग लिया जिसमें स्पेन, ईरान, पोलैंड, कजाकिस्तान, रूस प्रमुख हैं।
 
दूसरा दिन : लंदन
 
'हिन्दी महोत्सव' के तत्वावधान में दूसरे दिन 'वातायन' पुरस्कार दिए गए जिसमें पहला पुरस्कार 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' कुसुम अंसल तथा दूसरा पुरस्कार 'वातायन' कविता सम्मान' यतीन्द्र मिश्र को दिया गया। तीसरा 'संस्कृति सम्मान' कृष्ण कुमार गौर और चौथा 'वातायन' विशेष सम्मान' सरोज शर्मा को प्रदान किया गया।
 
पुरस्कार प्राप्त करते हुए यतीन्द्र मिश्र ने वाणी फाउंडेशन, यूके हिन्दी समिति, 'वातायन' और कृति यूके का विशेष आभार प्रकट किया और कहा कि उनके कविता कौशल को उन्होंने पहचाना और इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनको सम्मानित किया।
 
कुसुम अंसल का कहना था कि उनका जीवन ही उनका साहित्य दर्पण है और उसी की छवि वे अपने प्रवासी भाइयों और बहनों के साथ साझा करती आई हैं और ऐसे में 'वातायन' शिखर सम्मान और अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान उनके जीवन की तपस्या के फलस्वरूप आज मिला है। कृष्ण कुमार गौर और सरोज शर्मा ने पुरस्कार ग्रहण करते हुए 'हिन्दी महोत्सव' की सफलता पर सभी विद्वानों का धन्यवाद और आभार प्रकट किया।
 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूके के सांसद वीरेन्द्र शर्मा ने हिन्दी महोत्सव को बधाई देते हुए कहा कि विश्वभर के हिन्दीकर्मी खासकर यूके के साहित्यकार इस मंच पर इकट्ठे हैं और ये बहुत जरूरी है, क्योंकि विदेश में रह रहे भारतीय बच्चों को हिन्दी भाषा और उनके देश की परंपरा भाषा सिखाने का इससे अच्छा माध्यम और कोई नहीं हो सकता। वीरेन्द्र शर्मा ने कहा कि वे आने वाले समय में अपना पूरा सहयोग हिन्दी महोत्सव को देंगे। उन्होंने अगला हिन्दी महोत्सव को करने का आग्रह भी किया है।
 
'वातायन' संस्था की संस्थापक दिव्या माथुर ने कहा कि 2003 से 'वातायन' सम्मान यूके में भरतीय लेखकों, कलाकारों और कवियों का सम्मान करता आया है। माथुर ने कहा कि इस वर्ष इस वर्ष हिन्दी महोत्सव के तत्वावधान से जुड़कर इसका विस्तार स्वागतयोग्य है। कार्यक्रम का संचालन ऑक्सफोर्ड बिजनेस कॉलेज के प्रबंध निदेशक डॉ. पद्मेश गुप्त ने किया।
: स्लोह
 
लंदन के में हिन्दी महोत्सव 2018 का पर समारोह संपन्न हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि लंदन के सांसद वीरेन्द्र शर्मा ने अगले हिन्दी महोत्सव को ब्रिटिश संसद हाउस ऑफ कॉमन में आयोजित करने का निमंत्रण दिया। शिक्षा और साधन सत्र में ब्रिटेन के हिन्दी विद्यार्थियों ने हिन्दी की अनेक सुविधाओं की कमियों को रेखांकित किया। हिन्दी शिक्षकों ने उन पुस्तकों का अभाव बताया, जो यहां के हिन्दी शिक्षण और विद्यार्थियों के हिसाब से उपलब्ध नहीं हैं।
 
यूके हिन्दी समिति की अध्यक्ष सुरेखा चौफ्ला ने कहा कि उनकी टीम ने बड़े परिश्रम और अनुभव से इंग्लैंड के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए सामग्री तैयार की है जिसका अनेक हिन्दी के शिक्षक लंदन में प्रयोग कर रहे हैं। वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक और वाणी फाउंडेशन के अध्यक्ष अरुण माहेश्वरी ने हिन्दी समिति की इस पुस्तक को प्रकाशित करने को कहा जिसका सभी प्रतिनिधियों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। सत्र का संचालन सीमा वेदी तथा अध्यक्षता जय वर्मा ने की।
 
सत्र समापन के बाद कवि सम्मेलन आयोजित हुआ जिसने करीब 50 से अधिक प्रवासी और विदेशी हिन्दी छात्रों ने अपनी लिखी कविताओं का पाठ किया। छात्रों की उम्र 4 से 16 वर्ष की थी। कार्यक्रम में दिव्या माथुर की पुस्तक 'सिया-सिया' का विमोचन भी हुआ।
 
भारतीय उच्चायोग के हिन्दी और संस्कृति अधिकारी तरुण कुमार ने मॉरिशस में होने वाले 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन के विषय में विस्तार से बताते हुए सम्मेलन का प्रचार किया। अंत में हिन्दी महोत्सव के संयोजक डॉक्टर पद्मेश गुप्त ने पूरे उत्सव की अभूतपूर्व सफलता का विश्लेषण करते हुए कई प्रस्ताव रखे।
 
•हिन्दी विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए इंटरनेट पर अंतरराष्ट्रीय फोरम की स्थापना।
 
•प्रवासी लेखन को भारत में हिन्दी साहित्य की मूल धारा से जोड़ने के लिए नए कार्यक्रमों की योजनाओं पर विचार और प्रवासी लेखकों की रचनाओं को प्रकाशन में सहयोग की व्यवस्था।
 
•हिन्दी सिनेमा के चर्चित सितारों के साथ हिन्दी विद्यार्थियों की बातचीत का अवसर।
 
•इंटरनेट के क्षेत्र में हिन्दी शिक्षण की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए भारत में हिन्दी भाषा में कार्य कर रहे इंटरनेट एक्सपर्ट्स टीम और इंगलैंड के हिन्दी विद्यार्थियों और शिक्षकों की संयुक्त समिति का गठन।
 
•ऑनलाइन हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता की स्थापना।
 
•12वें विश्व हिन्दी सम्मेलन को लंदन में करवाने का भारत सरकार को प्रस्ताव।




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