हिन्दी आत्मा के सौंदर्य को निखारने की भाषा है : डॉ. पद्मेश गुप्त

परिचय : >  
डॉ. का जन्म 5 जनवरी 1965 को लखनऊ के प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। आपने लामर्टिनियर कॉलेज, क्रिश्चियन कॉलेज एवं लखनऊ विश्वविद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा करने के उपरांत इंस्टीट्यूट आफ रूर बैतरां ड्यूपां, फ्रांस में केमिकल इंजीनियरिंग का अध्ययन तथा कॉस्मेटिक इंडस्ट्रीज पर शोध किया। उसके उपरांत पद्मेश ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से साहित्यरत्न, एमबीए एवं इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में पीएचडी की उपाधि ग्रहण की। पद्मेश गुप्त अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू एवं फ्रेंच भाषाओं के जानकार हैं।
 
1990 में पद्मेश ने लंदन में यूके हिन्दी समिति की स्थापना की तथा 5 वर्षों तक हिन्दी पत्र का संपादन एवं प्रकाशन किया। आप 1993 में मैनचेस्टर में हुए अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन के दो सत्रों हेतु सह-अध्यक्ष चुने गए। 1993 से 2013 तक प्रतिवर्ष लंदन में होने वाले अंतरराष्ट्रीय हिन्दी कवि सम्मेलन का संयोजन करते रहे हैं।
 
2001 से 2014 तक पूरे ब्रिटेन एवं यूरोप में होने वाली हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता के संयोजन का भार भी पद्मेश निभाते रहे। सन् 2003 से हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता के 9 विजेताओं को हिन्दी समिति भारत भ्रमण पर ले जाती है। पद्मेश की 2003 में सूरीनाम में हुए 7वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में सक्रिय प्रतिभागिता रही।
 
पद्मेश अब तक ब्रिटेन में विश्व एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए 4 सम्मेलनों, लंदन में 20 अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलनों, 1999 में यूके में हुए 6ठे विश्व हिन्दी सम्मेलन के संयोजक, सैकड़ों साहित्यिक गोष्ठियों, अध्यापकों के अधिवेशन एवं शिविर तथा हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिताओं के संयोजन का दायित्व निभा चुके हैं।
 
आपने लंदन में टेलीविज़न चैनल पर हिन्दी कविता पर 'वाह, क्या बात है' सीरीज का कई महीनों तक संचालन किया। विश्व में मॉस्को, पोलैंड, बुडापेस्ट, बुखारेस्ट जैसे अनेक प्रतिष्ठित विश्व में व्याख्यान के अलावा आपने 2010 में दिल्ली में हुए प्रवासी फिल्म महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय संयोजन का दायित्व भी निभाया।
 
पद्मेश गुप्त राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मानों से विभूषित हो चुके हैं जिनमें प्रमुख हैं- 1997 में ताज महोत्सव, 2000 में उत्तरप्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा विदेशों में हिन्दी प्रचार, प्रवासी भारतीय दिवस 2003 में अक्षरम्, दिल्ली एवं सन् 2007 में न्यूयॉर्क में हुए 8वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारत सरकार द्वारा विश्व हिन्दी सम्मान।
 
2017 में पद्मेश गुप्त ने भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के कर-कमलों द्वारा केंद्रीय हिन्दी संस्थान, मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार ग्रहण किया। आपने यूके में हिन्दी की एकमात्र साहित्यिक पत्रिका 'पुरवाई' का 18 वर्षों तक संपादन एवं प्रकाशन किया तथा 'प्रवासी टुडे' पत्रिका का 8 वर्षों तक संपादन किया।


और भी पढ़ें :