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  4. There are monsters like Epstein in India too, brutality against 33 innocent people.
Last Updated : सोमवार, 23 फ़रवरी 2026 (16:48 IST)

भारत में भी हैं एप्‍सटीन जैसे हैवान, 33 मासूमों के साथ हैवानियत, 47 देशों में फैला डार्क वेब का जाल, अब फांसी

33 बच्‍चों के साथ हैवानियत करने वाले पति पत्‍नी को मौत हो जाने तक फांसी की सजा

banda epstin file
भारत में अमेरिका के एप्‍सटीन फाइल जैसा एक कांड सामने आया है, जिसमें कई बच्‍चों के साथ हैवानियत की गई। इस कांड में पति और उसकी पत्‍नी ने इस खौफनाक क्राइम को अंजाम दिया है।

दरअसल, यूपी के बांदा में बच्चों के यौन शोषण और वीडियो बनाकर डार्क वेब के जरिए 47 देशों में बेचने के मामले में अदालत ने पति-पत्नी को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। 10 साल तक 33 मासूमों को लालच, डर और ब्लैकमेल से फंसाया गया। 2020 में CBI जांच के बाद 74 गवाहों की सुनवाई के उपरांत फैसला आया।

मौत तक फांसी की सजा : घटना उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की है। जिसने मानवता को शर्मसार कर पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस केस में हाल ही में (फरवरी 2026) इस मामले में कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है और पति पत्‍नी को मौत हो जाने तक फांसी पर लटकाने की सजा दी है।

कौन हैं मुख्य आरोपी : इस खौफनाक अपराध के पीछे मुख्य आरोपी राम भवन था, जो उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग (जल संस्थान) में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर तैनात था। उसकी पत्नी दुर्गावती भी इस अपराध में बराबर की भागीदार थी। यह कपल बांदा और चित्रकूट के इलाकों में सक्रिय था।

अपराध करने का तरीका : राम भवन और उसकी पत्नी करीब 10 साल (2010 से 2020) तक इस घिनौने धंधे को चलाते रहे। जिसमें ये लोग गरीब परिवारों के छोटे बच्चों (ज्यादातर लड़कों) को निशाना बनाते थे। पीड़ितों में 3 साल तक के मासूम भी शामिल थे। दोनों आरोपी बच्चों को चॉकलेट, खिलौने, मोबाइल गेम खेलने का लालच और छोटे-मोटे गिफ्ट्स देकर अपने घर बुलाते थे। इसके बाद यहां बच्‍चों का यौन उत्पीड़न किया जाता था और उन हरकतों की वीडियो और फोटो बनाई जाती थी।

यौन शोषण के दौरान सभी बच्‍चों की वीडियो और रिकॉर्डिंग की जाती थी। बच्चों को डरा-धमका कर चुप रखा जाता था ताकि वे घर पर कुछ न बता सकें। कई बच्‍चे डर के मारे लंबे समय तक सहते रहे। यह ठीक अमेरिका की एप्‍स्‍टीन फाइल की तरह नजर आता है।

डार्क वेब और 47 देशों का कनेक्शन : बता दें कि यह सिर्फ एक स्थानीय अपराध नहीं था, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा भी था। आरोपी इन वीडियो को डार्क वेब (Dark Web) और अन्य एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड करता था। CBI की जांच में सामने आया है कि ये वीडियो दुनिया के लगभग 47 देशों के पीडोफाइल (बाल यौन अपराधी) नेटवर्क को बेचे जाते थे। इतना ही नहीं, आरोपी के पास से भारी मात्रा में कैश, मोबाइल और डिजिटल डेटा बरामद हुआ, जिससे विदेशी ग्राहकों के साथ उसके संबंधों का खुलासा हुआ।

कैसे हुआ कांड का खुलासा : इस मामले का भंडाफोड़ इंटरपोल (Interpol) की सूचना के बाद हुआ। इंटरपोल ने भारत सरकार को अलर्ट भेजा था कि उत्तर प्रदेश के कुछ मोबाइल नंबरों से बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) डार्क वेब पर शेयर की जा रही है। इसके बाद CBI ने अक्टूबर 2020 में केस दर्ज कर जांच शुरू की और राम भवन को गिरफ्तार किया।

अब तक क्या हुआ : इस मामले में 20 फरवरी 2026 को बांदा की विशेष POCSO अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने इसे "Rarest of Rare" (दुर्लभतम से दुर्लभ) मामला मानते हुए राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती, दोनों को फांसी की सजा सुनाई है।

पीड़ितों को मुआवजा : अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह सभी 33 चिन्हित पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दे।

जब्त संपत्ति : आरोपियों के घर से मिले कैश (लगभग 8.27 लाख रुपये) को भी पीड़ितों में बराबर बांटने का निर्देश दिया गया है। जज ने कहा कि इस दंपति ने बच्चों को "वस्तु" की तरह इस्तेमाल किया और उनके साथ जो क्रूरता की, उसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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