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Last Modified: नई दिल्ली , मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026 (13:22 IST)

WhatsApp पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट की मेटा को कड़ी फटकार, संविधान नहीं मान सकते, तो भारत छोड़ दें

supreme court scolds meta on whatsapp policy
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर मेटा प्लेटफॉर्म्स को सख्त चेतावनी दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि तकनीकी कंपनियां भारत में रहकर नागरिकों के निजता अधिकार से खिलवाड़ नहीं कर सकतीं। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर कंपनियां संविधान का पालन नहीं कर सकतीं, तो उन्हें देश छोड़ देना चाहिए।
 
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की बेंच कंपनियों को चेतावनी दी है कि या तो वे डेटा शेयर न करने का लिखित आश्वासन दें, वरना अदालत को आदेश पारित करना होगा। बेंच ने कहा कि इस मामले में 9 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित किया जाएगा।
 
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी की भाषा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निजता का अधिकार इस देश में बहुत महत्वपूर्ण है और कंपनियां इसका उल्लंघन नहीं कर सकतीं।
 
2021 की WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़े मामले में चल सुनवाई के दौरान भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने व्हाट्सएप पर 213 करोड़ रुपये के जुर्माना लगाया था जिसे राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण (NCLAT) ने बरकरार रखा था। इस फैसले को मेटा और व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।इस मामले पर सुनवाई कर रही है।
 
अदालत ने कहा कि आप डेटा शेयरिंग के बहाने इस देश की प्राइवेसी के साथ नहीं खेल सकते। आपकी प्राइवेसी की शर्तें इतनी चालाकी से तैयार की गई हैं कि एक आम आदमी उन्हें समझ ही नहीं पाता। यह निजी जानकारी चोरी करने का एक 'सभ्य तरीका' है। हम नागरिकों की निजता के साथ समझौता नहीं होने देंगे।
edited by : Nrapendra Gupta 
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