पीएम मोदी के काला जादू वाले बयान से राहुल गांधी नाराज, दिया जवाब
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले कपड़ों में कांग्रेस नेताओं के प्रदर्शन को काले जादू से जोड़ते हुए इसे कांग्रेस की हताशा का प्रतीक बताया। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री से कहा कि अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए, काला जादू जैसी अंधविश्वासी बातें करके पीएम पद की गरिमा को गिराना बंद कीजिए।
राहुल ने ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री को महंगाई नहीं दिखती? बेरोज़गारी नहीं दिखती? अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए, काला जादू जैसी अंधविश्वासी बातें करके पीएम पद की गरिमा को गिराना और देश को भटकाना बंद कीजिए, प्रधानमंत्री जी। जनता के मुद्दों पर जवाब तो देना ही पड़ेगा।
प्रधानमंत्री को महंगाई नहीं दिखती? बेरोज़गारी नहीं दिखती?
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 11, 2022
अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए, काला जादू जैसी अंधविश्वासी बातें करके पीएम पद की गरिमा को गिराना और देश को भटकाना बंद कीजिए, प्रधानमंत्री जी।
जनता के मुद्दों पर जवाब तो देना ही पड़ेगा।
इससे पहले जयराम रमेश ने भी ट्वीट कर कहा था कि ये काला धन लाने के लिए तो कुछ कर नहीं पाए, अब काले कपड़ों को लेकर बेमतलब का मुद्दा बना रहे हैं। देश चाहता है कि प्रधानमंत्री उनकी समस्याओं पर बात करें लेकिन जुमला जीवी कुछ भी बोलते रहते हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने पानीपत में 900 करोड़ रुपए की लागत से बना दूसरी पीढ़ी का इथेनॉल संयंत्र राष्ट्र को समर्पित करते हुए किसी पार्टी का नाम लिए बिना यह भी कहा कि आत्मनिर्भर बनने के भारत के प्रयास में मुफ्त उपहार एक बाधा है और यह करदाताओं पर बोझ भी है। उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोगों ने हताशा में 5 अगस्त को काला जादू किया।ये काला धन लाने के लिए तो कुछ कर नहीं पाए, अब काले कपड़ों को लेकर बेमतलब का मुद्दा बना रहे हैं।
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) August 10, 2022
देश चाहता है कि प्रधानमंत्री उनकी समस्याओं पर बात करें लेकिन जुमला जीवी कुछ भी बोलते रहते हैं। pic.twitter.com/YZNN8TCrCs
मोदी ने कहा कि पांच अगस्त को हमने देखा कि कैसे कुछ लोगों ने 'काला जादू' फैलाने की कोशिश की। ये लोग सोचते हैं कि काले कपड़े पहनने से उनकी निराशा खत्म हो जाएगी। लेकिन वे नहीं जानते कि जादू टोना, काला जादू और अंधविश्वास में लिप्त होकर वे फिर से लोगों का विश्वास अर्जित नहीं कर सकते।

