मुश्किल में सोनिया और राहुल गांधी, नेशनल हेराल्ड केस में दर्ज हुई नई FIR
National Herald Case New FIR: नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में दोनों के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की है।
EOW ने नेशनल हेराल्ड केस में PMLA की धारा 66(2) के तहत एक नई एफआईआर दर्ज की है। यह FIR 3 अक्टूबर को ईडी की शिकायत पर दर्ज हुई है। इसमें राहुल गांधी और सोनिया गांधी के अलावा 6 नाम और शामिल हैं। एफआईआर में 3 कंपनियां भी नामजद है।
क्या है नेशनल हेराल्ड केस : नेशनल हेराल्ड जिसका प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड करती थी उसकी स्थापना जवाहलाल नेहरू ने 1937 में की थी। नेशनल हेराल्ड को कांग्रेस का मुख्य पत्र माना जाता था। आजादी की लड़ाई में राष्ट्रवादी समाचार पत्र के रुप में जाना पहचाने जाने वाला नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन 2008 में आर्थिक तंगी के कारण बंद कर दिया गया। नेशनल हेराल्ड का संचालन करने वाली कर्ज में डूबी एजेएल कंपनी ने 2010 में यह घोषणा कर दी कि वह कर्ज नहीं चुका सकती।
23 नंवबर 2010 को गांधी परिवार की एक नान-प्राफिट कंपनी यंग इंडियन सामने आई, जिसके निदेशक सुमन दुबे और सैम पित्रोदा जैसे लोग बने। 13 दिसंबर 2010 को राहुल गांधी को भी निदेशकों के बोर्ड में शामिल किया गया। इसके बाद एजेएल के शेयर एक डील कर यंग इंडियन को ट्रांसफर कर दिए गए और 90 करोड़ का कर्ज 50 लाख लेकर माफ कर दिया गया। 22 जनवरी 2011 को सोनिया गांधी में इसकी निदेशक बन गई। यंग इंडियन की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी सोनिया-राहुल के पास है। दरअसल एजेएल को आर्थिक तंगी के कारण कांग्रेस पार्टी ने समय-समय पर 90 करोड़ रुपये उधार दिए थे। जबकि यह द रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट 1950 का उल्लंघन है। इसके मुताबिक कोई राजनीतिक पार्टी किसी को कर्ज नहीं दे सकती।
साल 2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दाखिल करते हुए सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के ही मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीज, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर घाटे में चल रहे नेशनल हेराल्ड अखबार को धोखाधड़ी और पैसों की हेराफेरी के जरिए हड़पने का आरोप लगाया था। आरोप लगाया गया कि कांग्रेसी नेताओं ने नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों पर कब्जे के लिए यंग इंडियन लिमिटेड ऑर्गेनाइजेशन बनाया और उसके जरिए नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (AJL) का अवैध अधिग्रहण कर लिया।
सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप था कि ऐसा दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपए की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया था। स्वामी ने 2000 करोड़ रुपए की कंपनी को केवल 50 लाख रुपए में खरीदे जाने को लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत केस से जुड़े कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की थी। जून 2014 ने कोर्ट ने सोनिया, राहुल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया। अगस्त 2014 में ED ने इस मामले में एक्शन लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। दिसंबर 2015 में दिल्ली के पटियाला कोर्ट ने सोनिया, राहुल समेत सभी आरोपियों को जमानत दे दी।
edited by : Nrapendra Gupta