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  4. BJP leaders have opened a front against IAS Santosh Verma, who made a controversial statement on Brahmin daughters.
Last Modified: शनिवार, 29 नवंबर 2025 (11:37 IST)

ब्राहमण बेटियों पर विवादित बयान देने वाले IAS संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नरोत्तम मिश्रा का अल्टीमेटम, BJP दिग्गजों ने भी खोला मोर्चा

BJP stalwarts have launched a front against IAS Santosh Verma
भोपाल। ब्राह्मण बेटियों को लेकर विवादित बयान देने वाले IAS संतोष वर्मा के खिलाफ अब दिग्गज भाजपा नेताओं ने मोर्चा खोला दिया है। IAS संतोष वर्मा के खिलाफ एक ओर ब्राहमण संगठन सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे है तो अब भाजपा नेताओं के मुखर होने के बाद पूरा मामले ने जबरदस्त तूल पकड़ लिया है और अब IAS संतोष वर्मा के खिलाफ दिल्ली तक शिकायत हो गई है।

नरोत्तम मिश्रा का अल्टीमेटम-भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि संतोष वर्मा जिसने हमारी बेटियों के लिए ऐसे शब्द कह दिए कि मन पीड़ा से भर गया, ऐसे व्यक्ति के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमने तो सरकार से आह्वान भी किया कि इसपर कार्रवाई कर दो और कार्रवाई नहीं हुई, तो हम सनातन वालों से पूछेंगे कि आप बताओ क्या करना है। किसी भी कीमत पर संतोष वर्मा जैसे लोग, ऐसे लोग समाज को तोड़ने का काम करते हैं. जो ये समाज को तोड़ने की बात करते हैं, उनकी हम खुले मंच से निंदा करते हैं.. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो वे सनातन धर्म मानने वालों से पूछेंगे कि आगे क्या कदम उठाना है.
 
जर्नादन मिश्रा ने केंद्र से की शिकायत-वहीं रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने IAS संतोष वर्मा के खिलाफ केंद्रीय कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। जर्नादन मिश्र ने IASसंतोष वर्मा के पूर्व के मामलों का उल्लेख भी किया और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की कि वर्मा के खिलाफ अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम 1968 के तहत कठारे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही अनुसूचित जाति वर्ग के बजाय अनुसूचित जनजाति वर्ग के माध्यम से इनकी पदोन्नति की जांच कराई जाए।
 
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र में सांसद जर्नादन मिश्रा ने लिखा रि "मैं आपका ध्यान एक गंभीर प्रकरण की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। जिसमें मध्यप्रदेश कैडर के IAS अधिकारी एवं अनुसूचित जाति अधिकारी-कर्मचारी संघ अजाक्स के हाल में ही निर्वाचित प्रांतीय अध्यक्ष संतोष वर्मा व्दारा दिए गए बयान में उन्होंने सार्वजनिक मंच पर जब तक कोई ब्राहमण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान न दे दे या उससे संबंध न बानये तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए जैसी अत्यंत अशोभनीय अपमानजनक आपत्तिपूर्ण लैंगिक रूप से संवेदनशील तथा जातिगत विद्वेष उत्पन्न करने वाली टिटपणी की है। वर्मा का उपरोक्त बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्दारा चलाए जा रहे महिला सशक्तीकरण अभियान के प्रति उनके नकारारात्मक मानसिकता को उजागर करता है तथा अभियान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर भी प्रश्न चिह्न लगता है।

उन्होंने आगे लिखा कि संतोष वर्मा अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के मध्यप्रदेश शासन के अधिकारी थे परन्तु उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन हेतु आपने आपको अनुसूचित जन जाति (ST) वर्ग का अधिकारी होने का उल्लेख किया जिससे उनका चयन मप्र से में हुआ है। वर्मा के विरुद्ध पूर्व में एक महिला के साथ मारपीट एवं अश्लील शब्दों के प्रयोग का प्रकरण न्यायालय में लंबित था। जिसमें वर्मा व्दारा फर्जी राजीनामा न्यायालय में प्रत्त्तुत किया गया । न्यायालय के संज्ञान में लाए जाने पर उनके विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया तथा सन् 2021 को उक्त प्रकरण में उनको गिरफतार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया । यह आपराधिक प्रकरण अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है। इसके वावजूद भी वर्मा की पदोन्नति भारतीय प्राशसनिक सेवा में की गई जिसमें जांच की आवश्यकता है। 
 
रीति पाठक ने बताया बेटियों की गरिमा से खिलवाड़- इसके साथी सीधी से भाजपा विधायक रीति पाठक ने भी IAS संतोष वर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रीति पाठक ने सोशल मीडिया पर लिखा  कि  एक जनप्रतिनिधि और एक महिला होने के नाते मैं संतोष वर्मा द्वारा बहनों और बेटियों के प्रति की गई टिप्पणी को अत्यंत दुखद, असंवेदनशील और अस्वीकार्य मानती हूँ। समाज की हर बेटी, हर बहन हमारा गौरव है, उनके बारे में इस प्रकार की अपमानजनक भाषा किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती। हमारी भारतीय संस्कृति में ‘नारी सम्मान’ सर्वोच्च मूल्य है। विशेष रूप से जब कोई अधिकारी जिम्मेदारी के पद पर हो, तो उससे अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी वाणी और व्यवहार से समाज में सम्मान, सद्भाव और विश्वास का वातावरण बनाए। मैं व्यक्तिगत रूप से ऐसी टिप्पणियों की कड़ी निंदा करती हूँ और अपेक्षा करती हूँ कि प्रशासन इस विषय में उचित कदम उठाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति मातृशक्ति की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने का दु:साहस न कर सके।हम सबका कर्तव्य है कि बहनों-बेटियों की गरिमा की रक्षा करते हुए एक संवेदनशील समाज और सुरक्षित वातावरण का निर्माण करें।
 
डिप्टी सीएम ने कार्रवाई के दिए संकेत-वहीं पूरे मामले पर प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सोशल मीडिया पर लिखा  कि एक आईएएस अधिकारी द्वारा बहन एवं बेटियों को लेकर की गई टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक, असंवेदनशील और समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा करने वाली है। किसी भी समाज के बहन एवं बेटियों के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी विकृत मानसिकता का परिलक्षण है।
 
उन्होंने आगे लिखा कि “एक उच्च पद पर बैठे अधिकारी से ऐसे विचार न केवल सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि प्रशासनिक गरिमा पर भी प्रश्न उठाते हैं। सरकार की स्पष्ट मान्यता है कि किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा मातृशक्ति के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी करना सामाजिक समरसता और संवैधानिक मर्यादा दोनों के विरुद्ध है। इस प्रकार की सोच भारतीय संस्कृति और हमारी परंपराओं का भी अपमान करती है। सभी वर्गों का सम्मान हमारी परंपरा का मूल है और किसी भी समुदाय विशेष को लक्षित कर की गई टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। इसी आधार पर सरकार द्वारा उनसे बयान पर स्पष्टीकरण मांगा गया है जो संतुष्टि प्रदायक न होने पर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।
 
गोपाल भार्गव ने भी खोला मोर्चा-वहीं मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और सीनियर भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने IAS संतोष वर्मा के खिलाफ सख्त एक्शन की मांग की है।  उन्होंने संतोष वर्मा के IAS अवार्ड होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो अधिकारी चरित्रहीन हैं और उस पर महिलाओं का यौनशोषण के आरोप भी लगे हैं. ऐसे अधिकारी को आईएएस अवार्ड मिल गया. वह मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मांग करेंगे कि जज के फर्जी हस्ताक्षर करने वाला कैसे आईएएस बन गया. ऐसे लोगों का आईएएस अवार्ड वापस होना चाहिए।