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  4. Lucy the street dog whose puppies were abandoned by the neighborhood, ran 27 km to find her pup
Last Updated : शनिवार, 14 फ़रवरी 2026 (13:23 IST)

मोहल्ले वालों ने जिस स्‍ट्रीट डॉग के बच्चों को फेंका था, वही लूसी बच्चे के लिए 27 KM दौड़ी, अथर्व को प्रोटेक्‍ट किया

Lucy dog
लूसी खुशी खुशी अपने बच्‍चों के साथ इंदौर के एक मोहल्‍ले में रहती थी, लेकिन मोहल्‍ले वालों को लूसी और उसके बच्‍चे पसंद नहीं थे। आवारा कुत्‍ते बोलकर मोहल्‍ले वालों ने लूसी के मासूम पिल्‍लों को दूर ले जाकर फेंक दिया। यह इंसानों की करतूत थी, लेकिन बदले में जानवर ने इंसान के बच्‍चों के लिए किया उसे सुनकर दिल भर आएगा और इंसानों की फितरत पर शर्म आने लगेगी। जहां इंसानों ने जानवरों जैसी हरकत की, वहीं, एक डॉग ने इंसानियत दिखाते हुए मिसाल पेश की।

यह कहानी है इंदौर की एक स्‍ट्रीट डॉग लूसी की। दरअसल का अथर्व नाम का एक बच्‍चा साइकिल की लॉन्ग राइड लेने के चक्कर में रास्ता भूल गया और भटक कर इंदौर से 27 किलोमीटर दूर देवास के पास शिप्रा पहुंच गया। इस बीच लूसी भी अथर्व के पीछे हो ली। उसे शंका थी कि बच्‍चा गफलत में भटक गया है, इसलिए लूसी उसके पीछे पीछे 27 किलो मीटर तक उसके पीछे दौड़ती रही। लूसी को अनहोनी की आशंका थी, इसीलिए उसने अथर्व का पीछा नहीं छोडा और उसके पीछे शिप्रा  पहुंच गई।

अथर्व को छूने तक नहीं दिया : शिप्रा में मौजूद कुछ लोगों ने घबराए हुए अथर्व को देखकर उससे बात की, लेकिन घबराहट में वह अपने पिता का मोबाइल नंबर भी नहीं बता पाया। इस पर उन लोगों ने उसे अपने पास बैठा लिया और पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस अथर्व को साथ ले जाने लगी तो लूसी बीच में आ गई और वह पुलिस को गुर्राने लगी। लूसी ने अथर्व को हाथ नहीं लगाने दिया।

अथर्व खाना खिलाता था लूसी को : दरअसल, लूसी अथर्व की कॉलोनी की थी। वह उसे खाना खिलाता है और उसने उसका नाम लूसी रखा है। लूसी अथर्व के घर से 100 मीटर दूर कैलाशपुरी के शिव मंदिर के आसपास के इलाके में रहती है। जब अथर्व मंदिर जाता है, तब वह उसे खाना खिलाता है। वह अथर्व के घर तक नहीं आती क्योंकि अथर्व की गली की में जो दूसरे कुत्ते रहते हैं, वह उसे आने नहीं देते, लेकिन इसके बाद भी लूसी का अथर्व के लिए लगाव कम नहीं है। आमतौर पर वह अथर्व को फॉलो नहीं करती लेकिन मंगलवार की शाम जब अथर्व साइकिल से निकला तो लूसी ने किसी अनहोनी की आशंका से उसे फॉलो किया और वह 27 किलोमीटर तक लगातार उसके पीछे दौड़ती रही।

उसके बच्‍चों को मोहल्‍ले वालों ने फेंक दिया था : जिस मोहल्ले ने उसके बच्चे फेंके उसी मोहल्ले के बच्चे के लिए वो 27 किमी दौड़ी। जब यह कहानी लोगों को पता चली तो वे भावुक हो गए। सिर्फ एक वक्‍त की सूखी रोटियों के बदले लूसी ने अथर्व के लापता होने की शंका में उसका 27 किमी तक साथ नहीं छोडा। जबकि इंसानों के साथ लूसी के अनुभव अच्छे नहीं हैं। इस घटना के करीब 5 दिन पहले ही मंदिर के आसपास के लोगों ने उसे और उसके बच्‍चों को उठाकर कहीं दूर फेंक दिया था, लेकिन वह वहीं आसपास रहने लगी थी। कुछ दिन पहले उसने जो बच्चे दिए थे, जिनमें से कुछ बच्चे मर गए और शेष तीन बच्चों को मोहल्ले वालों ने कहीं दूर ले जाकर छोड़ दिया लेकिन लूसी के भीतर की ममता नहीं मरी।

मोहल्‍ले वालों ने लूसी के रहने पर जताई थी आपत्‍ति : इस पर अथर्व के पिता सुधीर पंडित ने बताया कि बुधवार रात को जब अथर्व लूसी को दूध पिलाने गया था, उस समय भी आसपास के कुछ लोगों ने कहा था कि "तुम इसे अपने घर ले जाओ नहीं तो हम इसे फिर कहीं दूर छोड़ आएंगे"। उन्होंने आशंका जताई कि हो सकता है कि देर रात वे लोग लूसी को कहीं छोड़ आए हों। लूसी का डॉग बाइट का कोई रिकॉर्ड नहीं है। दरअसल मंदिर आने वालों को उससे यह समस्या है कि वह वहां गंदगी करती है। वहां के निवासी ने बताया कि जितनी समस्या उसे नहीं है, उससे ज्यादा उसके बच्चों से थी, जिसके चलते उसके बच्चों को दूर छोड़ दिया गया है।

लूसी ने दिखाई इंसानियत : इंदौर से लगातार बच्‍चे गायब हो रहे हैं, ऐसे में अथर्व के घरवालों को भी उसके लापता होने की आशंका सता रही थी। इंदौर के बंगाली चौराहे का 11 साल का अथर्व अपनी साइकिल लेकर निकला और रास्ता भटक गया था। वह पैडल मारते-मारते शहर से 27 किलोमीटर दूर शिप्रा पहुंच गया। घरवाले परेशान थे, पुलिस में FIR दर्ज हो चुकी थी। उधर अर्थव को समझ नहीं आया कि वह कहां आ गया और क्या करे? तब उसकी मददगार बनकर लूसी ही सामने आई। लूसी एक फीमेल डॉग है जो कैलाशपुरी मंदिर के पास रहती है। अथर्व अक्सर मंदिर जाते समय लूसी को खाना खिलाता था। और इसी छोटे से लगाव का कर्ज लूसी ने अपनी जान लड़ा कर चुकाया। उसने अथर्व की मदद करने वाले इंसानों पर भी भरोसा नहीं किया और न ही पुलिस पर। जब लूसी को भरोसा दिलाया गया कि अथर्व उनके साथ सुरक्षित है, उसके बाद ही उसने उसे कस्‍टडी में लेने दिया।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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