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Last Updated : सोमवार, 2 मार्च 2026 (18:43 IST)

चीनी एयर डिफेंस का फ्लॉप शो: ईरान में अमेरिका-इजराइल हमलों के आगे पस्त हुआ HQ-9B, 'ऑपरेशन सिंदूर' की यादें हुई ताजा

Chinese Air Defense Failure
Chinese Air Defense Failure: दुनियाभर में अपनी सैन्य तकनीक का डंका पीटने वाले चीन को एक बड़ा झटका लगा है। मार्च 2026 में ईरान पर हुए अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों ने चीनी रक्षा प्रणालियों की कलई खोल दी है। विशेष रूप से, चीन का सबसे उन्नत माना जाने वाला HQ-9B सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम इन आधुनिक हमलों को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।

1. ईरान में क्यों फेल हुआ चीन का 'ब्रह्मास्त्र'?

ईरान ने अपनी सुरक्षा के लिए चीन से लंबी दूरी का HQ-9B सिस्टम और YLC-8B एंटी-स्टेल्थ रडार खरीदे थे। दावा था कि यह रूसी S-300 से भी बेहतर है और स्टेल्थ विमानों (जैसे F-35) को आसानी से मार गिरा सकता है। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली:
  • इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग : अमेरिकी EA-18G ग्रोउलर विमानों ने ईरान के रडार नेटवर्क को इस कदर जाम कर दिया कि HQ-9B को पता ही नहीं चला कि मिसाइलें कहां से आ रही हैं।
  • AI और स्टेल्थ का हमला : अमेरिका और इजराइल ने AI-आधारित B-2 बॉम्बर्स और सुसाइड ड्रोन्स का इस्तेमाल किया। 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' के अनुसार, यह चीन के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है क्योंकि उसकी तकनीक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के सामने टिक नहीं पाई।

2. 'ऑपरेशन सिंदूर': जब भारत ने पाकिस्तान में चीनी सिस्टम के उड़ाए थे परखच्चे

ईरान की यह विफलता भारत के लिए कोई नई बात नहीं है। मई 2025 में जब भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था, तब भी यही कहानी दोहराई गई थी।
  • नॉन-कॉन्टैक्ट वॉर : भारत ने बिना सीमा पार किए सटीक मिसाइल और एयर स्ट्राइक्स से पाकिस्तान के भीतर लश्कर और जैश के मुख्यालयों को तबाह कर दिया।
  • पाकिस्तान की लाचारी : पाकिस्तान ने अपनी रक्षा के लिए चीन से मिले HQ-9B और J-10 फाइटर जेट्स तैनात किए थे। लेकिन भारतीय मिसाइलों ने इन चीनी प्रणालियों को चकमा देते हुए सीधे लक्ष्यों को हिट किया।
सबक: थिंक टैंक 'कैर्नी एंडोमेंट' ने इसे भारत की श्रेष्ठ सैन्य तैयारी और चीनी तकनीक की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण माना था।

3. चीन के सैन्य निर्यात पर उठते बड़े सवाल

यह पहली बार नहीं है जब चीनी हथियार युद्ध के मैदान में फेल हुए हैं। पाकिस्तान, वेनेजुएला और अब ईरान से आ रही खबरें चीन के 'मेड इन चाइना' डिफेंस एक्सपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
 
विशेषज्ञों का कहना है: "चीन के हथियार कागजों पर और परेड में तो बेहतरीन दिखते हैं, लेकिन वास्तविक युद्ध (Real-world Combat) में वे पश्चिमी और भारतीय तकनीक के सामने टिक नहीं पा रहे हैं।"
 
भारत के लिए बढ़ता आत्मविश्वास : ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और अब ईरान में चीनी सिस्टम की नाकामी ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल भारी हथियारों से नहीं, बल्कि बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और स्टेल्थ तकनीक से जीते जाते हैं। भारत अपनी स्वदेशी मिसाइल तकनीक और राफेल जैसे विमानों के दम पर इस क्षेत्र में एक नई शक्ति बनकर उभरा है।
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