सफल जीवन के लिए दृढ़ आत्मविश्वास जरूरी

सिर्फ इच्छा करने मात्र से ही हमें सफलता नहीं मिलती बल्कि सफलता पाने के लिए अपने भीतर को जगाना होता है और साथ ही दृढ़ संकल्पित होने की भी आवश्यकता होती है। दृढ़ में अद्भुत शक्ति होती है, जिसकी मदद से हम अपने जीवन में न सिर्फ सफलता बल्कि चिंताओं से भी मुक्ति पा सकते हैं।
ईश्वर ने मनुष्य का निर्माण ही कुछ इस प्रकार से किया है कि उसके सामने जब तक भागने का एक भी उपाय शेष रहता है, तब तक वह कष्ट पाने की अपेक्षा भागने के लिए ही लालायित रहता है। ऐसे व्यक्ति को विजय तभी प्राप्त हो सकती है, जब वह अपने दिल में दृढ़ संकल्प कर ले कि मनोवांछित चीज हासिल कर के रहूंगा।

जूलियस सीजर के बारे में कहा जाता है कि वह नेपोलियन की तरह अंतिम निर्णय लेने में माहिर था। युद्ध के समय वह तमाम दुविधाओं एवं विकल्पों को ही नष्ट कर दिया करता था। जब भागने का कोई मार्ग खुला न हो तो मनुष्य के लिए डटकर मुकाबला करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं होता है। इस स्थिति में योद्धा असहनीय कष्ट और कठिनाइयों को सहन करते हुए भी अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होता है।

यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में आने वाली बाधाओं पर विजय प्राप्त करने का निश्चय कर लेता है तो उसके भीतर एक आंतरिक महाशक्ति का उदय होता है। दृढ़ संकल्प में असीम शक्ति होती है जो व्यक्ति को किसी भी प्रकार की बाधाओं से जूझने में सक्षम बनाती है।

जब कोई व्यक्ति आत्मा से प्रतिज्ञा करता है कि वह लक्ष्य प्राप्ति में सफल होकर रहेगा, तो उसके अंदर की तमाम शक्तियां आश्चर्यजनक रूप से उजागर होने लगती हैं। जब उसकी आत्मा लक्ष्य पर अटल रहती है, तब उसकी सभी योग्यताएं उसकी मदद करने में जुट जाती हैं और परिणामस्वरूप वह साधारण से असाधारण बन जाता है।

अटूट संकल्प में वह शक्ति है जो कितनी भी बाधाएं क्यों न आ जाए, वह उन पर निरंतर विजय प्राप्त करता हुआ आगे बढ़ता चला जाएगा। ऐसे दृढ़ संकल्पित व्यक्ति के लिए पीछे हटने की कोई गुंजाइश ही नहीं होती है। अत: हमें चाहिए कि हम विजयी होने का दृढ़ संकल्प करें, जो भी कार्य करें वह पूरा मन लगाकर करें। दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास द्वारा किए गए कार्य में असीम उत्साह होता है, इससे हमारी मानसिक योग्यताओं का भरपूर विकास होता है, हमारी कार्यक्षमता कई गुणा बढ़ जाती है।

यदि हम अपने उद्देश्य को पूरा करने का दृढ़ निश्चय कर चुके हैं, यदि हमने यह निर्णय कर लिया है कि चाहे जो कुछ भी हो, हम अपने उद्देश्य से विमुख नहीं होंगे। आधे मन से नहीं बल्कि पूरे मन से श्रम एवं प्रयास करेंगे तो हमें हमारे प्रगति-पथ से विचलित करने की शक्ति दुनिया के किसी भी पदार्थ अथवा मनुष्य में नहीं है।

जो व्यक्ति संपूर्ण श्रद्धा से, दृढ़ संकल्प से, अटूट निष्ठा के साथ अपने लक्ष्य प्राप्ति हेतु जुट जाता है, उसके संकल्प से ही उसकी तमाम शक्तियां संगठित होकर उसके कार्य में नियोजित हो जाती हैं। ऐसा व्यक्ति कभी पीठ नहीं दिखाता, वह आगे और आगे बढ़ता जाता है, उसका हर कदम प्रगति की ओर अग्रसर होता रहता है।

शेक्सपियर का कथन है- ‘साहस और आत्मविश्वास से अवसर की पहचान होती है’। यदि हम एक कोने में बैठकर जीवन गुजारने लगें तो यह बेहतरीन 'टॉनिक' हमें कोई लाभ पहुंचा नहीं सकेगा। हमें हर रात सोने से पूर्व तथा प्रात: कार्य आरंभ करने से पहले दृढ़ संकल्प लेना चाहिए- ‘मैं यह कर सकता हूं और कर के रहूंगा’।

हमें उपरोक्त वाक्य को अपना आदर्श बना लेना चाहिए तथा इस विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए कि कुछ भी हमारी पहुंच से बाहर नहीं है। यदि आप सफलता के इच्छुक हैं तो अपने आप से वादा करें, प्रण करें, प्रतिज्ञा करें कि मनचाही सफलता के लिए आप कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, अपने श्रम एवं प्रयास में कोई कमी नहीं आने देंगे।

अपने निर्णय पर हम जितना भरोसा करेंगे, उसी अनुपात में हमें सफलता भी प्राप्त होगी। यदि हमारा संकल्प विजय का संकल्प है तो हमारी सफलता निश्चित है।



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