महामारी : क्या इन 5 कारणों से नष्ट हो जाएगी दुनिया?

Earth destruction
अनिरुद्ध जोशी| Last Updated: मंगलवार, 24 मार्च 2020 (18:44 IST)
धरती की आबादी लगभग 7 अरब के पार जा चुकी है। ऐसे में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन धरती को नष्ट कर रहा है। आओ जानते हैं कि वे कौन से 5 कारण हैं जिनसे धरती को खतरा है।

1.: ‍वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारी धरती अपनी धुरी से 1 डिग्री तक खिसक गई है और ग्लोबल वार्मिंग शुरू हो चुकी है। अब जल्द ही इसके प्रति सामूहिक प्रयास नहीं किए तो 'महाविनाश' के लिए तैयार रहें। लगातार मौसम बदलता जा रहा है। तापमान बढ़ रहा है। हो रहा है।

लगातर दुनिया के ग्लैशियर पिघल रहे हैं और जलवायु परिवर्तन हो रहा है। कहीं सुनामी तो कहीं भूकंप और कहीं तूफान का लगातार कहर जारी है। कुछ वर्ष पूर्व जापान में आई सुनामी ने दुनिया को बता दिया था कि किसे कहते हैं। ऐसी कई सुनामियां, भूकंप और ज्वालामुखियों ने दुनिया में प्रलय का चित्र खींच दिया था। धरती पर से प्राकृतिक आपदा के कारण कई बार कई जातियों और प्रजातियों का विनाश हो चुका है।

2. लाइलाज महामारी : घातक बीमारियों से मिट जाएगी आधी आबादी: एड्स, कैंसर, बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू आदि ऐसे कुछ ऐसी बीमारियां है जिसके चलते मनुष्‍य ही नहीं प्राणी जगत भी संकट में है। इन बीमारियों के कई कारण हो सकते हैं। अफ्रीका के बाद भारत एड्स के मामले में दूसरे नंबर पर है। देश में रजिस्टर्ड मरीजों की संख्‍या 5.2 लाख एड्स के रोगी है। यह संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसके अलावा स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू से ग्रसित लोगों की संख्या भी बड़ती जा रही है। पहले कैंसर आम रोग नहीं होता था लेकिन अब यह आप रोग होता जा रहा है। फिलहाल धरती से जूझ रही है।

3. एक गिरेगा और तबाही : ज्यादातर वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी पर प्रलय अर्थात जीवन का विनाश तो सिर्फ सूर्य, उल्कापिंड या फिर सुपर वॉल्कैनो (महाज्वालामुखी) ही कर सकते हैं। हालांकि कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि सुपर वॉल्कैनो पृथ्वी से संपूर्ण जीवन का विनाश करने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि कितना भी बड़ा ज्वालामुखी होगा वह अधिकतम 70 फीसदी पृथ्वी को ही नुकसान पहुंचा सकता है। अब जहां तक सवाल उल्कापिंड का है तो खगोलशास्त्रियों को पृथ्वी की घूर्णन कक्षा में ऐसा कई उल्कापिंड दिखाई दिए हैं, जो पृथ्वी को प्रलय के मुहाने पर लाने की क्षमता रखते हैं। इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि कोई भयानक विशालकाय उल्कापिंड पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के चंगुल में फंस जाए तो तबाही निश्चित है।

4.सुपर वॉल्कैनो से होगी तबाही : नए आकलन के मुताबिक पृथ्वी के भीतरी कोर का तापमान 6 हजार डिग्री सेल्सियस के करीब है। सूर्य की सतह का तापमान भी इतना ही होता है। वैज्ञानिककों का अनुमान है कि दुनियाभर के ज्वालामुखी से धरती के गर्भ में पल रही इस खौलती हुई आग का निष्कासन होता है।


ज्वालामुखी न सिर्फ पृथ्वी पर ही मौजूद हैं, बल्कि इनका अस्तित्व महासागरों में भी है। वैज्ञानिकों के अनुसार अनुमानत: समुद्र में करीब 10 हजार ज्वालामुखी मौजूद हैं। विनाशकारी सुनामी लहरों का निर्माण भी समुद्र के भीतर ज्वालामुखी विस्फोट से ही होता है। सबसे बड़ा ज्वालामुखी पर्वत हवाई में है। इसका नाम 'मोना लो' है। यह करीब 13,000 फीट ऊंचा है। इसके बाद सिसली के 'माउंट ऐटना' का नंबर आता है। यह विश्व का एकमात्र सबसे पुराना ज्वालामुखी है। यह 35,000 साल पुराना है।

वैज्ञानिकों के अनुसार आज से 70 हजार वर्ष पहले हवाई के ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था जिससे धरती की अधिकतर आबादी नष्ट हो गई थी, क्योंकि उसके काले धुएं से 6 वर्ष तक धरती ढंकी रही और फिर कई वर्षों तक धरती पर बारिश होती रही। ज्वालामुखी कभी भी धरती के लिए खतरा बन सकते हैं। इनसे धरती के भीतर भूकंपीय गतिविधियां बढ़ती रहती हैं और ये धरती के पर्यावरण को भी प्रभावित करते हैं। दुनिया का हर देश ज्वालामुखी के ढेर पर बैठा है।

5. तृ‍तीय विश्व युद्ध : परमाणु हथियारों की दौड़ ने अपना परंपरागत स्थान बदल लिया है और अब इसने यूरोप-अमेरिका को छोड़कर एशिया का रुख कर लिया है। स्टॉकहोम स्थित अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में सामूहिक विनाश के हथियारों का सबसे बड़ा शस्त्रागार चीन के पास है। जानकार लोग लगातार इस बात की चेतावनी देते रहे हैं कि परमाणु और रासायनिक हथियारों का उपयोग धरती से मानव जाती को नष्ट कर देगा।

स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों- अमेरिका, रूस, ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के अलावा भारत, पाकिस्तान और इसराइल के पास परमाणु हथियारों और उन्हें लेकर उड़ने वाली मिसाइलों की कुल संख्या 17 हजार 265 थीं जबकि सन् 2011 में यह संख्या 19 हजार हो गई।


चीन, भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु हथियारों की दौड़ सबसे तेज है। सन् 2012 में चीन के पास परमाणु हथियारों की संख्या 240 से बढ़कर 250, भारत के पास 100 से बढ़कर 110, पाकिस्तान के पास 110 से बढ़कर 120 हो गई। पाकिस्तान, इस प्रकार, भारत से भी आगे निकल गया है।

यहां सबसे बड़ी समझने वाली बात यह है कि अकेले चीन के पास ही इतने परमाणु बम हैं कि वह धरती को कई बार नष्ट कर सकता है। आज परमाणु हथियारों का खतरा हिरो‍शिमा और नागासाकी पर गिरे बम के काल से कहीं अधिक है। तृतीय युद्ध की कल्पना करना भी सामूहिक विनाश की घातक कल्पना है।


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