मकर संक्रांति 2019 पर बन रहे हैं यह विशेष शुभ योग, जानिए सूर्य देव को कैसे करें प्रसन्न


मकर संक्रांति के दिन सूर्य की उपासना अत्यंत शुभ फलदायक माना गया है। हर साल आमतौर पर 14 जनवरी को आता है। साल 2019 में मकर का शुभ मुहूर्त 15 जनवरी के दिन भी है।

सूर्यदेव को सभी नौ ग्रहों में सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य न्याय के देवता शनि देव के पिता हैं। सूर्य देव किसी भी जातक को सरकारी नौकरी दिलाने में अहम योगदान करते हैं साथ ही किसी भी व्यक्ति के जीवन में यश का कारक भी सूर्य ही हैं।

पर इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए बेहद खास माना गया है।

इस बार संक्रांति का वाहन सिंह एवं उपवाहन गज (हाथी) होगा। वर्ष 2019 में संक्रांति श्वेत वस्त्र धारण किए स्वर्ण-पात्र में अन्न ग्रहण करते हुए कुंकुम का लेप किए हुए उत्तर दिशा की ओर जाती हुई आ रही है।

जिस जातक की कुंडली में सूर्य ग्रह शुभ स्थिति में होता है वह उच्चपद प्राप्त करता है।

साथ ही सूर्य के प्रभाव से उसकी ख्याति और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होती है। सूर्य देव सिंह राशि के स्वामी ग्रह भी हैं। सूर्य की दशा 6 वर्ष के लिए होती है। सूर्य का रत्न माणिक्य है।

सूर्य की प्रिय वस्तुएं गाय, गुड़, और लाल वस्त्र आदि हैं। तांबा और सोना को सूर्य की प्रिय धातु माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं, यह अत्यंत शुभ फलदायक साबित होते हैं।

शास्त्रों में सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। रविवार के दिन गेहूं और गुड़ गाय को खिलाने या किसी ब्राहमण को दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही सूर्य मजबूत होता है।

विष्णु पुराण के अनुसार रविवार के दिन सूर्य देव को आक का एक फूल श्रद्धा पूर्वक अर्पित करने से मनुष्य को 10 अशर्फियां दान का फल मिलता है। इतना ही नहीं इस फूल को नियमित चढ़ाने से व्यक्ति करोड़पति बन सकता है।

भगवान सूर्य को खुश करने के लिए रात के समय कदंब और मुकुल के फूल अर्पित करना श्रेयस्कर माना जाता है। सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए बेला का फूल ही एक ऐसा फूल है जिसे दिन या रात किसी वक्त चढ़ा सकते हैं।

इसके अलावा कुछ फूल ऐसे भी हैं, जिसे सूर्य देव को कदापि नहीं चढ़ाना चाहिए। ये पुष्प हैं गुंजा, धतूरा, अपराजिता और तगर आदि।

 

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