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Written By WD Feature Desk

Papamochani Ekadashi Katha 2026: पापमोचिनी एकादशी की कथा कहानी

भगवान विष्‍णु का मनभावन फोटो
Papmochini Ekadashi story: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में से पापमोचिनी एकादशी को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। यह एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है और इसका नाम ही बताता है कि यह व्रत मनुष्य के सभी पापों को नष्ट करने वाला माना गया है।ALSO READ: चैत्र नवरात्रि 2026: कौनसी तिथि किस दिन? घटस्थापना से पारण तक पूरा शेड्यूल
 
इस दिन व्रत रखने, कथा सुनने और भगवान की पूजा करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस एकादशी का संबंध एक प्रसिद्ध कथा से भी है जिसमें मेधावी ऋषि और अप्सरा मंजुघोषा का उल्लेख मिलता है। यह कथा बताती है कि कैसे इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य अपने पापों से मुक्त हो सकता है। इस वर्ष पापमोचिनी एकादशी 15 मार्च 2026 को मनाई जा रही है।
 

यहां पढ़ें पापमोचिनी एकादशी की कथा....

 
कथा:
इस एकादशी व्रत की कथा के अनुसार प्राचीन समय में चित्ररथ नामक एक रमणिक वन था। इस वन में देवराज इंद्र गंधर्व कन्याओं तथा देवताओं सहित स्वच्छंद विहार करते थे। एक बार मेधावी नामक ऋषि भी वहां पर तपस्या कर रहे थे। 
 
वे ऋषि शिव उपासक तथा अप्सराएं शिव द्रोहिणी अनंग दासी (अनुचरी) थी। एक बार कामदेव ने मुनि का तप भंग करने के लिए उनके पास मंजुघोषा नामक अप्सरा को भेजा। युवावस्था वाले मुनि अप्सरा के हाव भाव, नृत्य, गीत तथा कटाक्षों पर काम मोहित हो गए। रति-क्रीडा करते हुए 57 वर्ष व्यतीत हो गए।
 
एक दिन मंजुघोषा ने देवलोक जाने की आज्ञा मांगी। उसके द्वारा आज्ञा मांगने पर मुनि को भान आया और उन्हें आत्मज्ञान हुआ कि मुझे रसातल में पहुंचाने का एकमात्र कारण अप्सरा मंजुघोषा ही हैं। क्रोधित होकर उन्होंने मंजुघोषा को पिशाचनी होने का श्राप दे दिया।ALSO READ: Papmochani Ekadashi 2026. पापमोचनी एकादशी कब है?
 
श्राप सुनकर मंजुघोषा ने कांपते हुए ऋषि से मुक्ति का उपाय पूछा। तब मुनिश्री ने पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखने को कहा और अप्सरा को मुक्ति का उपाय बताकर पिता च्यवन के आश्रम में चले गए। 
 
पुत्र के मुख से श्राप देने की बात सुनकर च्यवन ऋषि ने पुत्र की घोर निंदा की तथा उन्हें पापमोचिनी चैत्र कृष्ण एकादशी का व्रत करने की आज्ञा दी। व्रत के प्रभाव से मंजुघोष अप्सरा पिशाचनी देह से मुक्त होकर देवलोक चली गई।
 
इसतरह जो कोई इस व्रत के महात्म्य को पढ़ता-सुनता है उसे सारे संकटों से मुक्ति मिल जाती है तथा पापों का नाश होकर पुण्‍यफल प्राप्त होता है, इसके साथ ही जो भी कोई मनुष्य विधिपूर्वक इस व्रत पालन करके इसे करता है, उसके सारों पापों की मुक्ति होना निश्चित है। पापमोचिनी एकादशी व्रत का फल मिलता है।

पापमोचनी एकादशी-FAQs

1. पापमोचनी एकादशी का व्रत कैसे रखा जाता है?
भक्त इस दिन फलाहार व्रत या निर्जला व्रत रखते हैं और अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करते हैं।
 
2. पापमोचनी एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
इस दिन तामसिक भोजन, झूठ बोलना, क्रोध करना और गलत कार्यों से बचना चाहिए।
 
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