जगदीशपुर में इस्लाम नगर के बोर्ड लगे होने पर हंगामा, बोर्ड पर पोती कालिख
भोपाल। राजधानी भोपाल में एक बार नाम बदलने के लिए सियासत और उस पर हंगामा हो रहा है। दरअसल सरकार ने करीब दो साल पहले भोपाल के इस्लाम नगर का नाम बदलकर जगदीशपुर कर दिया था लेकिन अब भी वहां पर कई बोर्ड पर इस्लाम नगर लिखे होने के बाद हिंदूवादी संगठनों ने विरोध जताते हुए जगदीशपुर में इ्स्लाम नगर लिखे शब्दों पर कालिख पोत दी और जगदीशपुर के बैनर लगा दिए।
हिंदुत्व समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी के नेतृत्व में बड़ी हिंदूवादी संगठन से जुड़े लोगों ने जमकर नारेबाजी करते हुए जिन बोर्ड पर इस्लाम नगर लिखा था उस पर कालिख पोत दी। वहीं चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि लांबाखेड़ा–जगदीशपुर मार्ग पर लगे कई संकेतक बोर्डों पर जगदीशपुर की जगह इस्लाम नगर लिखे जाने पर घटना ने स्थानीय क्षेत्र में भारी आक्रोश पैदा कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो साल पहले इस्लाम नगर का नाम जगदीशपुर किया था और उसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी हुआ था लेकिन आज भी बोर्ड का नाम नहीं बदलना सरकार के आदेश का उल्लंघन है।
चंद्रशेखर तिवारी ने मांग की है सभी बोर्डों को मूल नाम जगदीशपुरमें तत्काल बहाल किया जाए, इसके साथ इलाके की क्षतिग्रस्त किलोमीटर मीटर बोर्ड की मरम्मत की जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।विरोध के बीच कार्यकर्ताओं ने मौके पर ही बोर्ड पर जगदीशपुर पर्यटन स्थल का नया फ्लेक्स लगाकर अपना रोष और स्पष्ट संदेश दर्ज किया।
इधर स्थानीय प्रशासन ने आश्वस्त किया कि मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। घटना के बाद से क्षेत्र में नाम बदलने की कोशिशों को लेकर गहमागहमी बनी हुई है, और स्थानीय लोग प्रशासन से त्वरित एवं ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस्लाम नगर क्यों बना जगदीशपुर ?-भोपाल के निकट इस्लाम नगर जिसे अब जगदीशपु के नाम से जाने जाता है वहां पर 11वीं सदी के परमार कालीन मंदिर के पत्थर और मूर्तिया मिली जो परमार काल के मंदिरों के अवेशष थे। परमारों के उपरांत यह क्षेत्र गढ़ा-मण्डला जबलपुर के गोंड राजा संग्राम शाह के बावन गढ़ों में से एक था, इसलिए यहां पर एक गोंड महल भी है। गोंड प्रशासन के उपरान्त यह गढ़ अथवा किला देवड़ा राजपूतों द्वारा शासित था।
सन् 1715 में दोस्त मोहम्मद खान ने जगदीशपुर पर आक्रमण किया। किन्तु उसे सफलता नहीं मिली। तब उसने षड़यंत्रपूर्वक बेस नदी के किनारे सहभोज के लिए बुलाया। जब सभी राजपूत मेहमान रात्रिभोज कर रहे थे तभी तम्बू की रस्स्यिां काट दी गयीं और सभी राजपूतों को हलाल कर दिया गया। कहते हैं कि इतना खून बहा कि नदी का पानी लाल हो गया और तभी से यह नदी हलाली के नाम से जाने जाने लगी। इस तरह धोखे से जगदीसपुर पर दोस्त मोहम्मद ने कब्जा कर लिया और उसका नाम बदलकर इस्लामनगर कर दिया।
दोस्त मोहम्मद अफगनिस्तान के खैबर के तीराह का रहने वाला था। 1696 में वह उत्तरप्रदेश के जलालाबाद आ गया। वह इतना क्रोधी स्वभाव का था कि उसने छोटी बात पर हुए झगड़े में अपने को शरण देने वाले अमीर जलाल खान के दामाद को सरेआर मार डाला। वहां से भागकर वह करनाल और फिर दिल्ली चला गया। यहां मुगल सेना में भर्ती हो गया। मुगल और मराठा युद्ध के चलते वह 1703 में मालवा आ गया। यहां उसने अपने हथियार आदि विदिशा के शासक मोहम्मद फारूख के पास जमा कर दिया और थोड़़े से झगड़े के बाद उसकी भी हत्या कर दी।
इसके बाद वह मंगलगढ़ में शरण पाने में सफल हो गया और वहां के महाराज-महारानी के साथ महल में रहने लगा। तभी महाराज की मृत्यु हो जाने पर दोस्त मोहम्मद ने मंगलगढ़ को भी लूट लिया और सारा खजाना लेकर बैरसिया आ गया। यहां भी अपने स्वभाव के अनुरूप यहां के सूबेदार ताज मोहम्मद से पहले तो बैरसिया लीज पर लिया और बाद में उसे भी धोखा देकर बैरसिया पर कब्जा जमा लिया।
मध्यप्रदेश में जब पिछले सालों में जब तत्कालीन शिवराज सरकार में नाम बदलने का सिलसिला शुरु किया तब इस्लाम नगर का नाम बताने की मुहिम ने तेजी पकड़ी। स्थानीय भाजपा विधायक विष्णु खत्री ने खुद इस मामले में पहल कर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने इस पूरे मुद्दें को रखा। खुद मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान ने इसका नाम बदल दिया था।