मध्यप्रदेश में गेहूं की खरीदी को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन, जीतू पटवारी ने सरकार पर साधा निशाना
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की तारीखों में बार-बार हो रहे बदलाव और बरादाने की कमी को लेकर गुरुवार को पूरे प्रदेश में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया। भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की। वहीं पीसीसी जीतू पटवारी ने सागर में और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीहोर में प्रदर्शन किया है। सीहोर में कांग्रेस के प्रदर्शन केे दौरान कलेक्टर को बुलाने की मांग पर अड़े नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अधिकारियों के साथ तीखी बहस हुई। इसके बाद उमंग सिंघार ने एक कुत्ते को सीहोर का कलेक्टर बताते हुए उसे ज्ञापन सौंपा।
वहीं भोपाल से छतरपुर जाते समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, सागर में किसानों के साथ विरोध जताया। दरअसल जिले में गेहूं खरीदी शुरू न होने से नाराज किसानों ने जीतू पटवारी को जब दर्द सुनाया और मंडी बंद होने की बात कही तो पटवारी ने मौके पर ही कलेक्टर को फोन लगा दिया। सागर कलेक्टर संदीप जीआर से फोन पर बात करते हुए जीतू पटवारी ने मंडी खुलवाने और तत्काल गेहूं खरीदी केंद्र शुरू कराने की बात कही। जीतू पटवारी ने कहा कि किसानों को समय पर फसल बेचने का अधिकार है और इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
जीतू पटवारी ने तल्ख लहजे में कलेक्टर से कहा कि कलेक्टर साहब, पटवारी बोल रहा हूँ। यह मंडी तीन-चार दिन से बंद है और भीषण गर्मी में किसान यहाँ पाँच-पाँच दिन से परेशान होकर पड़े हैं। आप मौके पर आइए। इस मौके पर जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने चुनाव के समय गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपए प्रति क्विंटल करने का वादा किया था, लेकिन आज किसान अपना अनाज ओने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर है। पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि किसानों को उनकी फसल का दाम नहीं मिला और खरीदी व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई, तो पूरी प्रदेश की मंडियों में कामकाज ठप कर दिया जाएगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बारदाने की कमी का बहाना बनाकर सरकार जानबूझकर देरी कर रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
सागर में प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना था कि शासन द्वारा आज से गेहूं खरीदी शुरू किए जाने की घोषणा की गई थी. किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंच गए, लेकिन हम्मालों की हड़ताल के कारण तुलाई कार्य शुरू नहीं हो सका। इसके चलते मंडी में गेहूं की ढेरियां लग गई हैं और फसल खुले में पड़ी होने से उसके खराब होने का खतरा बढ़ता जा रहा है.।किसानों ने कहा कि यदि जल्द खरीदी शुरू नहीं हुई तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।