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जानिए क्या है उपच्छाया चंद्र ग्रहण...

सोमवार,नवंबर 30, 2020
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30 नवंबर को वर्ष 2020 का अंतिम चंद्रग्रहण लगेगा, इस दिन कार्तिक पूर्णिमा पर्व भी मनाया जाएगा। इस बार का चंद्रग्रहण रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में पड़ रहा है।
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सोमवार, 30 नवंबर 2020 को साल का अंतिम चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। ग्रहण के दौरान और बाद में क्या करें, जानें आइए जानें 15 काम की बातें...
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जानिए इस साल के आखिरी चंद्रग्रहण से जुड़ी सारी जानकारी।
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30 नवंबर को साल 2020 का अंतिम 'चंद्र ग्रहण' है, यह एक 'उपच्छाया चंद्र ग्रहण' है, जो कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, प्रशांत महासागर क्षेत्र और एशिया के हिस्सों दिखाई देगा।
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मांद्य चंद्रग्रहण का कोई धार्मिक महत्त्व नहीं होने के कारण यह महज़ एक खगोलीय घटना होगी जिसका जनमानस पर कोई व्यापक प्रभाव नहीं होगा इसलिए इस ग्रहण के सूतक-यम-नियम आदि जनमानस के लिए प्रभावी नहीं होंगे।
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समुद्र मंथन के दौरान जब देवों और दानवों के साथ अमृत पान के लिए विवाद हुआ तो इसको सुलझाने के लिए मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया।
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05 जुलाई 2020 को चंद्र ग्रहण है। इसी दिन गुरु पूर्णिमा भी है। ये चंद्र ग्रहण धनु राशि में लगेगा। ये साल का तीसरा चंद्र ग्रहण होगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इस खगोलीय घटना को आप ऑनलाइन जरूर आप देख सकते हैं।
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चंद्रग्रहण का 5 राशियों पर अशुभ प्रभाव होने वाला है। आइए जानते हैं ये राशियां कौन सी हैं और इन पर क्या असर पड़ेगा…
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जानते हैं 5 जुलाई को होने वाले चंद्र ग्रहण से जुड़ी खास जानकारी।
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ग्रहण के बाद दान से दुर्घटनाओं से बचाव होता हैं। ग्रहण की नकारात्मकता का तेज बहुत अधिक होता है , इसलिए उनसे बचाव होना बहुत आवश्यक होता है।
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5 जुलाई 2020 को लगने वाले चंद्र ग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होगा यानि किसी भी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित नहीं होंगे। पूजा पाठ और भोजन से जुड़े कार्य किया जा सकेंगे। लेकिन फिर भी संयम बरतने और नियमों का पालन करना जरूरी है।
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5 जुलाई 2020 को वर्ष का तीसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। 5 जुलाई को लगने वाले इस ग्रहण की शुरुआत 8 बजकर 38 मिनट से होगी जो 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। आओ जानते हैं पांच खास बातें।
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रविवार, 5 जुलाई 2020 को उपछाया चंद्र ग्रहण है। दिव्य पर्वों में ग्रहण का भी विशेष स्थान है। अतः नियम एवं संयम के साथ स्नान जप, तप, और हवन यज्ञ के द्वारा बाधाओं की निवृत्ति एवं सुखों
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समुद्र मंथन के दौरान जब देवों और दानवों के साथ अमृत पान के लिए विवाद हुआ तो इसको सुलझाने के लिए मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया।
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चंद्र ग्रहण को मंत्रों की सिद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। ग्रहण काल में मंत्र जपने के लिए माला की आवश्यकता नहीं होती बल्कि समय का ही महत्व होता है।
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आइए जानते हैं ग्रहण काल के समय किन बातों को विशेष सावधानी रखना आवश्‍यक है तथा ग्रहण के बाद किन नियमों का पालन जरूरी है।
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ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसका ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व होता है। भगवान श्रीकृष्‍ण के 108 नामों का चंद्र ग्रहण के दौरान जाप करने से समस्त विपत्तियों का नाश होता है।
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5 जून 2020 आज चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। आइए जानें 15 विशेष बातें...
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ग्रहण के बाद दान का विशेष महत्व माना जाता है। चंद्रग्रहण के समय सूर्य, चंद्रमा एवं पृथ्वी एक ही क्रम में होते हैं, जिसके कारण चंद्रग्रहण लगता है। ग्रहण के बाद कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से ग्रहण के दुष्प्रभाव दूर होते हैं।
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