दिल है कि मानता नहीं
लव-मंत्र
दोस्तो! हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमां लेकिन फिर भी कम निकले। सचमुच हम इनसान कभी भी अपनी स्थिति से संतुष्ट नहीं हो सकते। जितनी भी खुशियाँ हमारी झोली में डाल दी जाएँ, हमें वे नाकाफी लगती हैं। हर दिन दिल में नए अरमान हिचकोले लेने लगते हैं। हमारी बस यही तमन्ना होती है कि जीवन की हर खुशी पर हमारा कब्जा हो। कोई भी पहलू किसी भी रूप में फीका न रह जाए। जिंदगी में तमाम तरह की मिठास और हर प्रकार के रंग भरने के लिए हम इतने बेताब हो जाते हैं कि बेवजह मुसीबतों को न्योता देने निकल पड़ते हैं। कहते हैं न कि 'आ बैल मुझे मार' सचमुच हम पर लागू होता सा लगता है।ठीक इसी प्रकार अपने सुकून और खुशियों भरे जीवन में उथल-पुथल लाने के लिए बेताब हैं महेश दुबे (बदला हुआ नाम)। शादी के बाद पति-पत्नी में अच्छा तालमेल और प्यार है। महेश खुशमिजाज व्यक्तित्व रखते हैं और जीवन को खूब मजे में पूरे रस के साथ जी रहे हैं। इन सारी खुशियों के बावजूद अब महेश को अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड यानी प्रेमिका की याद सताने लगी है। कभी-कभी वह इतने बेचैन हो जाते हैं कि उन्हें लगता है, वह फिर से अपने पुराने रिश्ते को जीवित कर लें। अपने आपको रोक पाना अब उनके लिए कठिन हो रहा है। दिल है कि मानता नहीं।महेश जी, पहली गलती तो आपने यह की कि घर वालों के दबाव में आकर अपने प्यार को ठुकरा दिया एवं किसी और से शादी कर ली। जब आप और आपकी दोस्त एक-दूसरे को बेइंतहा प्यार करते थे, रिश्ते से बेहद खुश थे, एक-दूसरे से कोई शिकायत नहीं थी तो केवल पारिवारिक दबाव के कारण अपने दोस्त को यूँ छोड़ देना उचित नहीं था। आपकी दोस्त का कोई दोष नहीं था फिर भी आपने उसके पक्ष में स्टैंड नहीं लिया। आपकी शादी हो गई और आपकी किस्मत अच्छी थी कि आपकी बीवी अच्छे स्वभाव की समझदार और प्यार करने वाली निकली। आप अपने वर्तमान से खुश भी हैं। फिर आपको अपने भूत को कुरेदने की क्या सनक चढ़ी है।बेशक आपकी दोस्त भी समझदार हैं और अब भी आपको प्यार करती हैं। उन्होंने आपकी परिस्थिति से मजबूर होकर की गई शादी के लिए भी आपको माफ कर दिया है और आपके प्रति उनके दिल में कोई दुर्भावना नहीं है। वह अब भी अकेली हैं इसलिए आपके लिए अब भी उसको पाना आसान है लेकिन उसके साथ फिर से प्रेम कहानी की शुरुआत न केवल पेचीदा होगी बल्कि आप तीन लोगों के लिए बेहद पीड़ादायक बन जाएगी।महेश जी, आपने पहले अपनी दोस्त के जीवन और भविष्य के बारे में नहीं सोचा पर कम से कम अब तो उस मजलूम के बारे में सोचें। उसे उस प्रेम कहानी को भूलने की सलाह दें। आप भी उसमें अपनी कोई दिलचस्पी न दिखाएँ। आपको यही दिखाना चाहिए कि आप उसे बीती हुई याद की तरह लेते हैं। उसका सम्मान करते हैं और उसके दोस्त हैं।इससे वह आपको भूलकर किसी और में रुचि लेना शुरू करेगी या फिर आपकी तरह घर की पसंद के लड़के से शादी करेगी। उसके जीवन में भी तो स्थायित्व आने दीजिए जैसे आपने अपना घर बसा लिया है। प्यार की एक परीक्षा में तो आप फेल हो गए पर आगे एक संतुलित एवं व्यावहारिक कदम उठाकर बाकी बचे रिश्ते के साथ इंसाफ करें। अपनी दोस्त के साथ इस प्रकार आप न्याय कर पाएँगे।महेश जी, हमेशा अपनी खुशी ही नहीं देखनी चाहिए। अगर आपने अपनी दोस्त के साथ खूबसूरत पल बिताए हैं तो उसकी याद तो आपको आएगी ही। हर व्यक्ति का प्यार का अंदाज जुदा होता है। उसके घुलने-मिलने का अंदाज अलग होता है। कुछ लोगों के साथ आप बहुत ही सरलता से सारी बातें कर लेते हैं। अपनी हर बात, शौक, चाहत बिना झिझक बोल देते हैं। बिताया हुआ समय आपको सुकून और संतुष्टि से भरा लगता है। ऐसे में स्वाभाविक है कि उस व्यक्ति की चाहत और याद बार-बार आपको बेचैन करेगी। उसे भूल पाना आसान नहीं होगा। पर, उस रिश्ते की दबी आग को हवा देना अपने आशियाने को खुद जलाने के समान है। उस खुशी और प्यार की भावना में बहना बहुत स्वाभाविक है लेकिन इससे क्या हासिल होगा। पहले आपने अपनी दोस्त को दगा दी अब अपनी पत्नी को देंगे। आपके इस कदम से तीनों की दुनिया बिखर जाएगी।
आपको लगता है आप फिर से उसके साथ प्यार भरे पल बिताएँगे तो आपको वही खुशी, सुकून और संतुष्टि मिलेगी पर ऐसा नहीं होगा। आपका भ्रम बहुत जल्दी टूट जाएगा। आपकी खुशी पर दोहरे रिश्ते के भार का दबाव इतना ज्यादा होगा कि आप मस्ती में रहना भूल जाएँगे। आपकी दोस्त जितनी भी समझदार हो, आपके हालात समझकर रिश्ता शुरू करने पर भी कुछ ही दिनों में उसकी भावनात्मक माँग को पूरा करना आपके लिए कठिन होगा। उसकी आँखों में आए आँसुओं से आप भी आहत होंगे। यदि आप थोड़े से भी अच्छे इनसान हैं तो इस कशमकश से आपको बहुत कष्ट पहुँचेगा। पुराने प्रेम को शुरू करना तनाव को दावत देना है।हो सकता है, आप उसके प्रेम में इतना डूब जाएँ कि आपको अपना घर-संसार बेमानी लगने लगे। आखिर आप अपनी दोस्त को अपनी पत्नी से ज्यादा जानते हैं और आपने उसके साथ प्रेम करना सीखा है। उस खुशी और प्यार की भावना में बहना बहुत स्वाभाविक है लेकिन इससे क्या हासिल होगा। पहले आपने अपनी दोस्त को दगा दी अब अपनी पत्नी को देंगे। आपके इस कदम से तीनों की दुनिया बिखर जाएगी। आप यदि दूरी रखेंगे तो आपकी दोस्त धीरे-धीरे अपना जीवनसाथी ढूँढ़ लेंगी। यह रिश्ता जिस मोड़ पर आकर ठहर गया है, उसे वहीं ठहरा रहने दें। इसी में सबकी भलाई है।