जब कंधे पर हो तेरा हाथ
तेरा साथ है तो ...
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कहा जाता है कि रिश्तों की गुत्थी में उलझना बहुत आसान होता है परंतु रिश्तों से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करना उतना ही मुश्किल।
कहने को तो कई दर्जन लोग हमारे दोस्त होते हैं परंतु हमारी तकलीफ में वही दोस्त काम आता है, जो हमारे दर्द को अपना दर्द समझता है। जिसे अपनी ख्याति से कोई मतलब नहीं होता है और नि:स्वार्थ भाव से वो हमारे लिए काम करता है। हमारा यह दोस्त भीड़ में खड़े लोगों से अलग-थलग होता है परंतु उसके होने का अहसास हमेशा हमारे साथ होता है। उसके अलावा बाकी लोग तो केवल वाहवाही लूटना व झूठी प्रशंसा करना ही जानते हैं।
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हम सभी के पास अपने हर सवाल का जवाब है लेकिन यह भी सत्य है कि व्यक्ति जीवन की दौड़ में कब तक अकेला दौड़ पाएगा। उसमें क्षमताएँ व प्रतिभाएँ तो भरपूर हैं परंतु कहीं न कहीं तो उसे भी एक सहारे की जरूरत है। वह भी हौसलाअफजाई चाहता है।
किसी पर भरोसा जताकर उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना भी बहुत बड़ी बात है। आपका सच्चा दोस्त यदि आप पर भरोसा जताता है तो ये मत समझिए कि यह कहने मात्र से ही उसका काम पूरा हो गया है। आप पर भरोसा जताना उसके ऊपर बहुत सारी जिम्मेदारियाँ लाता है।
सच्चे दोस्त का प्यार से सिर पर हाथ फेर देना व 'मैं हूँ ना' कहना ही हमारे और उसके रिश्ते में विश्वास पैदा करता है। अपने पास होने के अहसास के लिए कहे गए ये तीन शब्द उसके लिए एक चैलेंज होते हैं अपनी रेस के घोड़े को जीत का स्वाद चखाने के इसलिए जब भी कोई आपसे यह शब्द कहता है तब समझ लो कि उसे आपसे बहुत आशाएँ हैं और साथ ही आप पर भरोसा भी कि आप इसे कर सकते हो।
