सूखे से किसान बेहाल, पर...
गुवाहाटी से रविशंकर रवि
आचार संहिता लागू होने के साथ ही असम में भी विकास की तमाम गतिविधियां थम गई हैं। लेकिन प्रकृति पर कोई आचार संहिता नहीं चलती। इस बार राज्य में जबरदस्त सूखा पड़ रहा है और किसान बेहाल हैं। राज्य सरकार आचार संहिता की दुहाई देकर हाथ पर हाथ धरे बैठी है। जब तक चुनाव प्रक्रिया समाप्त होगी, सूखे की वजह से कम से कम दस जिलों के किसान बेहाल हो चुके होंगे। मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने सूखे की स्थिति पर कहा कि हम संबंधित पक्षों की अनुमति लेकर ही कुछ कर सकते हैं।
राज्य में पिछले चार माह से बारिश नहीं हुई है। इस वजह से सूखे की स्थिति हो गई है। खेतों पर दरार पड़ने लगी है। इससे अकाल का संकट मंडरा रहा है। सच तो यह है कि राज्य में सिचांई की एक भी योजना कारगर नहीं है। मुख्यमंत्री खुद मानते हैं कि अब तक लोग वर्षा और बाढ़ के पानी पर निर्भर थे, वैकल्पिक सिंचाई योजनाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। वह कहते हैं कि सरकार के पास सूखे से निपटने के लिए पर्याप्त राशि है, लेकिन आचार संहिता की वजह से वे किसानों की मदद नहीं कर पा रहे हैं।
राज्य की कृषिमंत्री प्रमिला रानी ब्रह्मा के अनुसार हमने सूखे से निपटने की तैयारी की थी, लेकिन चुनाव घोषित होने के कारण काम रोकना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री तथा अगप नेता प्रफुल्ल कुमार महंत इसे सरकार की बहानेबाजी मानते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए चुनाव आयोग को विश्वास में लिया जा सकता है, बशर्ते कि राज्य सरकार इसका राजनीतिक लाभ नहीं उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में हाहाकार की स्थिति है।
आचार संहिता लागू होने के साथ ही असम में भी विकास की तमाम गतिविधियां थम गई हैं। लेकिन प्रकृति पर कोई आचार संहिता नहीं चलती। इस बार राज्य में जबरदस्त सूखा पड़ रहा है और किसान बेहाल हैं। राज्य सरकार आचार संहिता की दुहाई देकर हाथ पर हाथ धरे बैठी है। जब तक चुनाव प्रक्रिया समाप्त होगी, सूखे की वजह से कम से कम दस जिलों के किसान बेहाल हो चुके होंगे। मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने सूखे की स्थिति पर कहा कि हम संबंधित पक्षों की अनुमति लेकर ही कुछ कर सकते हैं।
राज्य में पिछले चार माह से बारिश नहीं हुई है। इस वजह से सूखे की स्थिति हो गई है। खेतों पर दरार पड़ने लगी है। इससे अकाल का संकट मंडरा रहा है। सच तो यह है कि राज्य में सिचांई की एक भी योजना कारगर नहीं है। मुख्यमंत्री खुद मानते हैं कि अब तक लोग वर्षा और बाढ़ के पानी पर निर्भर थे, वैकल्पिक सिंचाई योजनाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। वह कहते हैं कि सरकार के पास सूखे से निपटने के लिए पर्याप्त राशि है, लेकिन आचार संहिता की वजह से वे किसानों की मदद नहीं कर पा रहे हैं।
राज्य की कृषिमंत्री प्रमिला रानी ब्रह्मा के अनुसार हमने सूखे से निपटने की तैयारी की थी, लेकिन चुनाव घोषित होने के कारण काम रोकना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री तथा अगप नेता प्रफुल्ल कुमार महंत इसे सरकार की बहानेबाजी मानते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए चुनाव आयोग को विश्वास में लिया जा सकता है, बशर्ते कि राज्य सरकार इसका राजनीतिक लाभ नहीं उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में हाहाकार की स्थिति है।

