वरुण गाँधी की माँग बढ़ी
वरुण गाँधी का नाम भाजपा के स्टार कैंपेनर के रूप में काफी तेजी से उभर रहा है। कई राज्यों में वरुण गाँधी को प्रचार में भेजने की माँग भाजपा के दिल्ली कार्यालय में आई है। अधिकांश राज्यों में युवा कार्यकर्ता चाहते हैं कि वरुण गाँधी कम से कम एक बड़ी चुनावी सभा को जरूर संबोधित करें। वरुण के विवादित भाषण देने के बाद ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि उनके भाषणों की माँग बढ़ेगी।
वरुण गाँधी को बाला साहेब ठाकरे के समर्थन के बाद तो महाराष्ट्र में भी वरुण को जल्द से जल्द भेजने की माँग की जा रही है। वैसे भाजपा द्वारा राष्ट्रीय स्तर के चुनाव प्रचारकों की सूची में केवल छः नाम रखे हैं जिनमें लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष राजनाथसिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू, अरुण जेटली तथा सुषमा स्वराज।
भाजपा का यह कहना है कि वरुण की गिनती अभी स्टार प्रचारकों में नहीं की जा सकती। अब भाजपा के वरिष्ठ नेता चाहे जो भी कहें पर आम कार्यकर्ता की इच्छा तो यही है कि उनके क्षेत्र में वरुण गाँधी आएँ। अब जबकि वरुण गाँधी की गिरफ्तारी का ड्रामा इतने बड़े पैमाने पर खेला गया हो तब वरुण की लोकप्रियता बढ़ना लाजिमी है।
भाजपा भले ही खुले रूप से वरुण का साथ नहीं दे रही है परंतु पीलीभीत में जो भी कुछ हुआ इससे साफ जाहिर है कि भाजपा इस संपूर्ण मामले में बैकग्राउंड म्युजिक जरूर बजा रही है।
वरुण की गिरफ्तारी को लेकर पीलीभीत में जो भीड़ इकट्ठा की गई, वह भाजपा के इशारे पर ही की गई। न केवल कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा बल्कि साधु-संतों को भी वहाँ पर उपस्थित रहने के लिए कहा गया। दरअसल भाजपा वरुण को हिन्दूवादी नेता की तरह उप्र में पेश करना चाहती है। परंतु इसके लिए वह पूर्ण मेहनत पहले ही कर लेना चाहती है।
मोदी को उप्र में नहीं भेज सकते : भाजपा में कट्टर हिन्दूवादी नेता की छवि नरेन्द्र मोदी की भी है परंतु नरेन्द्र मोदी को उप्र और बिहार जैसे राज्यों में इतनी लोकप्रियता हासिल नहीं है। नरेन्द्र मोदी को महाराष्ट्र, मप्र, राजस्थान व गुजरात में अच्छी लोकप्रियता हासिल है।
भाजपा चाहती थी कि कोई ऐसा नेता सामने आए जो युवा भी हो और जल्द लोकप्रिय भी हो जाए। वरुण गाँधी के साथ गाँधी परिवार का नाम जुड़ा है इस कारण उप्र में उन्हें गाँधी परिवार की तिकड़ी सोनिया, राहुल, प्रियंका की एकतरफा लोकप्रियता के विरुद्ध भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
अब तक भाजपा ने वरुण वाले मामले पर काफी फूँक-फूँक कर कदम रखे हैं अब देखना यह है कि आगे आने वाले दिनों में क्या होता है। (नईदुनिया)
वरुण गाँधी को बाला साहेब ठाकरे के समर्थन के बाद तो महाराष्ट्र में भी वरुण को जल्द से जल्द भेजने की माँग की जा रही है। वैसे भाजपा द्वारा राष्ट्रीय स्तर के चुनाव प्रचारकों की सूची में केवल छः नाम रखे हैं जिनमें लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष राजनाथसिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू, अरुण जेटली तथा सुषमा स्वराज।
भाजपा का यह कहना है कि वरुण की गिनती अभी स्टार प्रचारकों में नहीं की जा सकती। अब भाजपा के वरिष्ठ नेता चाहे जो भी कहें पर आम कार्यकर्ता की इच्छा तो यही है कि उनके क्षेत्र में वरुण गाँधी आएँ। अब जबकि वरुण गाँधी की गिरफ्तारी का ड्रामा इतने बड़े पैमाने पर खेला गया हो तब वरुण की लोकप्रियता बढ़ना लाजिमी है।
भाजपा भले ही खुले रूप से वरुण का साथ नहीं दे रही है परंतु पीलीभीत में जो भी कुछ हुआ इससे साफ जाहिर है कि भाजपा इस संपूर्ण मामले में बैकग्राउंड म्युजिक जरूर बजा रही है।
वरुण की गिरफ्तारी को लेकर पीलीभीत में जो भीड़ इकट्ठा की गई, वह भाजपा के इशारे पर ही की गई। न केवल कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा बल्कि साधु-संतों को भी वहाँ पर उपस्थित रहने के लिए कहा गया। दरअसल भाजपा वरुण को हिन्दूवादी नेता की तरह उप्र में पेश करना चाहती है। परंतु इसके लिए वह पूर्ण मेहनत पहले ही कर लेना चाहती है।
मोदी को उप्र में नहीं भेज सकते : भाजपा में कट्टर हिन्दूवादी नेता की छवि नरेन्द्र मोदी की भी है परंतु नरेन्द्र मोदी को उप्र और बिहार जैसे राज्यों में इतनी लोकप्रियता हासिल नहीं है। नरेन्द्र मोदी को महाराष्ट्र, मप्र, राजस्थान व गुजरात में अच्छी लोकप्रियता हासिल है।
भाजपा चाहती थी कि कोई ऐसा नेता सामने आए जो युवा भी हो और जल्द लोकप्रिय भी हो जाए। वरुण गाँधी के साथ गाँधी परिवार का नाम जुड़ा है इस कारण उप्र में उन्हें गाँधी परिवार की तिकड़ी सोनिया, राहुल, प्रियंका की एकतरफा लोकप्रियता के विरुद्ध भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
अब तक भाजपा ने वरुण वाले मामले पर काफी फूँक-फूँक कर कदम रखे हैं अब देखना यह है कि आगे आने वाले दिनों में क्या होता है। (नईदुनिया)

