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Written By ND
Last Modified: बुधवार, 22 अप्रैल 2009 (15:38 IST)

'बागी' माधवराव की विजय

माधवराव सिंधिया
-राकेश पाठक

ग्वालियर। सन्‌ 1996 का लोकसभा चुनाव अंचल की राजनीति में एक अलग इतिहास रचने वाला साबित हुआ। 'हवाला कांड' के घेरे में आने पर माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस से बगावत की और अपने दम पर जीते।

इस चुनाव में राजमाता की इच्छा पर भाजपा ने माधवराव के लिए मैदान खाली छोड़ा। यही अब तक का एकमात्र चुनाव रहा जिसमें कांग्रेस की जमानत तक नहीं बची। अंचल की बाकी तीनों सीटों पर भी कांग्रेस की लुटिया डूब गई।

सन्‌ 91 के चुनाव के दौरान श्रीपेरुम्बुदूर में राजीव गाँधी की मानव बम के जरिए हत्या कर दी गई। चुनाव बाद कांग्रेस में नेतृत्व संकट उभरा, तब बुजुर्ग व तजुर्बेकार नेता पामुलापर्ति वेंकट नरसिंहराव को कमान सौंप दी गई, लेकिन 95 आते-आते जैन बंधुओं की कथित डायरियों में से 'हवाला' का जिन्न निकल आया। इस जिन्न का शिकंजा जिन दिग्गज नेताओं की गर्दनों पर कसा उनमें माधवराव सिंधिया भी थे। नरसिंहराव ने 'हवाला कांड' के आरोपियों को टिकट नहीं देने का ऐलान कर दिया।

सिंधिया ने इस पूरे मामले को षड्यंत्र माना और अपने राजनीतिक जीवन का पहला 'जोखिम' लिया। उन्होंने मप्र विकास कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भरा। माधवराव सिंधिया के बगावत करने पर कांग्रेस ने स्वतंत्रता सेनानी शशिभूषण वाजपेयी को प्रत्याशी बनाया।

भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व विधायक माधवशंकर इंदापुरकर को प्रत्याशी बनाया। श्रीइंदापुरकर के नाम का ऐलान होने पर ही यह मान लिया गया था कि भाजपा इस बार चुनाव लड़ने के मूड में नहीं है। अंततः नामांकन वापसी के दिन इंदापुरकर ने पर्चा वापस ले लिया।

भाजपा की ओर से कहा गया कि विकास कांग्रेस के प्रत्याशी माधवराव सिंधिया कांग्रेस को हराने के लिए मजबूत प्रत्याशी हैं इसलिए वह (भाजपा) अपना प्रत्याशी हटा रही है। लेकिन असल में राजमाता विजयाराजे की इच्छा पर उनके पुत्र की राह आसान की गई थी।

उधर बसपा ने अपना आधार मजबूत कर लिया था जिसका सबूत मतपेटियाँ खुलने पर मिला। सिंधिया को रिकॉर्ड 3 लाख 37 हजार 539 वोट मिले और बसपा के फूलसिंह बरैया को 1 लाख 13 हजार वोट मिले। सिंधिया 2 लाख 23 हजार 994 मतों से जीते।

कांग्रेस के शशिभूषण वाजपेयी को मात्र 26 हजार वोट मिले और उनकी जमानत तक जब्त हो गई। सन्‌ 96 के चुनाव में बसपा ने चौंकाने वाली बढ़त हासिल की। पार्टी ग्वालियर के अलावा भिण्ड व मुरैना में भी दूसरे नंबर पर आ गई।

भिण्ड में भाजपा के डॉ. रामलखनसिंह ने बसपा के केदारनाथ को मात्र 15 हजार 797 वोटों से हराया। मुरैना में भी बसपा ने अच्छा मुकाबला किया। यहाँ अशोक अर्गल ने प्रीतम चौधरी को 37 हजार वोटों से हराया। भिण्ड व मुरैना में कांग्रेस तीसरे नंबर पर सरक गई। गुना में विजयाराजे सिंधिया ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की और कांग्रेस के केपी सिंह को 1 लाख 30 हजार 824 वोटों से हराया।
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