मिश्राजी साहित्य के प्रधान सेवक हैं। साहित्य सेवा का यह बीड़ा उन्होंने 55 किलोग्राम श्रेणी में ही उठा लिया था, जब वे युवावस्था की दहलीज पर एक पैर पर खड़े थे। मिश्राजी ने यह जिम्मेदारी साहित्य के बिना कहे ही अपने कंधों और शरीर के हर अंग...