1. सामयिक
  2. डॉयचे वेले
  3. डॉयचे वेले समाचार
  4. narendra modi named in epstein files
Written By DW
Last Modified: सोमवार, 2 फ़रवरी 2026 (07:46 IST)

एप्सटीन फाइल्स में पीएम मोदी के नाम पर विवाद

एप्स्टीन फाइल्स में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर देश में विवाद उठ खड़ा हुआ है। सरकार ने इस बारे में सफाई दी है।

PM Narendra Modi name in epstein files

-विवेक कुमार
भारत के विदेश मंत्रालय ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है जिनमें तथाकथित जेफ्री एपस्टीन फाइल्स में नरेंद्र मोदी और उनके इस्राएल दौरे का संदर्भ होने की बात कही गई थी। मंत्रालय ने बयान में इन संदर्भों को "दोषी ठहराए गए अपराधी की घटिया मनगढ़ंत बातें” बताते हुए कहा कि इन्हें "पूरे तिरस्कार के साथ” खारिज किया जाना चाहिए।

मंत्रालय ने कहा कि उसने "तथाकथित एपस्टीन फाइल्स” से जुड़े एक ईमेल संदेश के बारे में रिपोर्टें देखी हैं, जिसमें प्रधानमंत्री और उनके इस्राएल दौरे का जिक्र है। विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री के इस्राएल के आधिकारिक दौरे के तथ्य के अलावा, ईमेल में किए गए बाकी संकेत या इशारे दोषी ठहराए गए अपराधी की "घटिया मनगढ़ंत बातें” भर हैं, जिन्हें "पूरे तिरस्कार के साथ” खारिज किया जाना चाहिए।

विपक्ष ने लगाए आरोप

इससे पहले विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि एप्स्टीन फाइल्स में नरेंद्र मोदी का नाम होना शर्मनाक है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री को 3 सवालों के जवाब देने चाहिए। अपनी पोस्ट में खेड़ा ने लिखा, "एप्स्टीन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच यह संबंध देश की प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय छवि से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। इसलिए प्रधानमंत्री को स्वयं आगे आकर तुरंत जवाब देना चाहिए।”
 
उन्होंने अपनी पोस्ट में ये सवाल पूछे हैं -
पहला: प्रधानमंत्री जेफ्री एप्स्टीन से किस प्रकार की सलाह ले रहे थे?
दूसरा: इजराइल में अमेरिकी राष्ट्रपति के ‘फायदे' के लिए गाना और नाचने का क्या मतलब था?
तीसरा: जब संदेश में लिखा है ‘काम हो गया', तो वास्तव में कौन‑सा काम सफल हुआ?
 
पोस्ट में उन्होंने अमेरिकी न्याय मंत्रालय का लिंक भी साझा किया। खेड़ा ने लिखा कि भारत के प्रधानमंत्री का "इतने बदनाम व्यक्ति के इतने करीब होना उनके निर्णयों, पारदर्शिता और कूटनीतिक गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े करता है अब यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री का एप्स्टीन से सीधा संबंध था, जिसके पीछे की कोई स्पष्ट वजह अब तक सामने नहीं आई है।"

एप्स्टीन फाइल्स से खुलासे

भारत में यह विवाद ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने शुक्रवार को फाइनेंसर और दोषी ठहराए गए यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी जांच सामग्री का एक बड़ा हिस्सा जारी किया। जारी सामग्री में 30 लाख से ज्यादा पन्नों के रिकॉर्ड, 2,000 से अधिक वीडियो और करीब 1,80,000 तस्वीरें सार्वजनिक करने की बात कही गई है। इन दस्तावेजों में दुनिया के कई बड़े लोगों के नाम हैं। 
 
इन खुलासों की घोषणा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने की। उन्होंने कहा कि यह रिलीज उस पारदर्शिता संबंधी आदेश को पूरा करता है, जिसे अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले साल पारित किया था। ब्लांश के अनुसार, "आज की रिलीज एक बहुत व्यापक दस्तावेज पहचान और समीक्षा प्रक्रिया के अंत को दर्शाती है, ताकि अमेरिकी जनता के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके और अधिनियम के अनुपालन को पूरा किया जा सके।”
 
उसी रिपोर्ट में बताया गया है कि जेफ्री एपस्टीन की मौत न्यूयॉर्क की एक जेल में अगस्त 2019 में आत्महत्या से हुई थी। यह घटना उसके सेक्स ट्रैफिकिंग आरोपों में आरोपित होने के करीब एक महीने बाद हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले भी एपस्टीन 2008 में एक विवादास्पद समझौते के बाद फ्लोरिडा में हिरासत में 13 महीने काट चुका था।
ये भी पढ़ें
बजट से खादी और वस्त्र क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार, यूपी में लाखों लोगों के लिए सृजित होंगे नए अवसर