उड़न तश्तरी की हकीकत, कितनी सही कितनी झूठ

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वर्ष 1997 में एक जनमत संग्रह में 80 फीसदी अमेरिकियों का मानना था कि सरकार उड़न तश्तरियों के मामले में उनसे सच्चाई छिपा रही है। इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि राष्ट्रपति भवन को बयान जारी करके लोगों को भरोसा दिलाना पड़ा कि सरकार कोई जानकारी नहीं छिपा रही है।

दुनियाभर में उड़न तश्तरी देखे जाने के हजारों दावे किए जा चुके हैं लेकिन विज्ञान की कसौटी पर उड़न तश्तरी अब भी खरी नहीं उतरी है।

तेल अवीव यूनीवर्सिटी के प्रोफेसर कोलिन प्राइस उड़न तश्तरी को प्राकृतिक परिघटना के रूप में देखते हैं। उन्होंने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में कहा था कि दरअसल उड़न तश्तरी एक प्राकृतिक परिघटना है। उन्होंने इसका नाम स्प्राइट यानी जादुई परी रखा था।

हालांकि वर्ष 1989 में दुर्घटनावश स्प्राइट की परिघटना को रिकॉर्ड कर लिया गया था। उस समय एक खगोल विज्ञानी ने तारों का अध्ययन करते समय अपनी शक्तिशाली दुरबीन से जुड़े कैमरे में कौतूहलपूर्ण क्षणिक घटना को कैद कर लिया था।

बाद में प्रो. प्राइस और उनकी टीम ने उस पर गंभीर अध्ययन किया तो पाया कि धरती से 50 से 120 किलोमीटर पर इस तरह की घटनाएं खास परिस्थितियों में लगातार होती रहती हैं।

बादलों के टकराने से जिस ऊंचाई पर बिजली बनती है, स्प्राइट उससे भी 20 किमी पर बनती है। इसका संबंध इन्हीं प्राकृतिक घटनाओं से है। चूंकि यह आकाश में नाचती हुई दिखाई देती है इसलिए इसे स्प्राइट नाम दिया गया है। यह दृश्य चंद सेकंड ही दिखाई देता है।

अनेक देशों के वायुसैनिक, यात्री विमान पायलट, खगोल विज्ञानी और दूरदराज जंगलों में काम करने वाले किसान से लेकर चरवाहे तक उड़न तश्तरी को देखने का अपना अनुभव दर्ज करा चुके हैं।

इतना ही नहीं, उन्होंने कई सबूत भी पेश किए। इनमें फोटोग्राफ, राडार में पकड़े गए सिग्नल, उड़ते विमान, हेलिकॉप्टर के उपकरणों में आई बाधाएं, प्रत्यक्षदर्शियों के शरीर में आए बदलाव और कई जगह पाए गए कथित अवशेष भी शामिल हैं, पर वैज्ञानिक उन सबूतों को पर्याप्त मानते हैं।

वैज्ञानिक मानते हैं कि खास प्राकृतिक घटनाओं की वजह से ऐसा दिखाई देता है। आकाश में काफी ऊंचाई पर बनने वाले शक्तिशाली चक्रवातों की वजह से विद्युतीय तरंगें पैदा होती है, जो विमानों और राडारों को प्रभावित करती हैं। कई बार तो इन परिस्थितियों में व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से भी प्रभावित हो जाता है, ऐसे में चक्रवात जैसी प्राकृतिक घटनाएं भी चमत्कारिक लग सकती हैं।
नई दिल्ली| Last Updated: गुरुवार, 2 जुलाई 2020 (12:22 IST)

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