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रंग-बिरंगी पतंग

पतंग
- गिरीश पंड्‍य
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रंग-बिरंगी पतंगें देख

सूरज दादा घबराए

कहीं मुझमें ना अटक जाए

खैर इसी में है अब तो

कि अभी ना बाहर आऊं

उस छोटे बादल के पीछे

जाकर मैं छिप जाऊं।

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