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गिरिवन का हाथी

हाथी पर कविता
चूहेजी ने वोट दिया था,
उस दिन मोटे भालू को।
यह अंदाज नहीं भाया था,
बूढ़े लोमड़ कालू को।

कालू बोला बेटे चूहे,
तुमने यह ना ठीक किया।
भालू जैसे भ्रष्टाचारी,
बेईमान को वोट दिया।

बेईमान मक्कारों को अब,
हमें नहीं सत्ता देना।
किसी तरह भी चोर लुटेरों,
से कुर्सी वापिस लेना।

गिरिवन का हाथी सच्चा है,
उसे वोट देकर आएं।
नैतिकता, सिद्धांतवादियों,
को कुर्सी पर बिठवाएं।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें