उठो धरा के अमर सपूतों
- द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी
उठो धरा के अमर सपूतों, पुन: नया निर्माण करो।जन-जन के जीवन में फिर से नवस्फूर्ति, नव प्राण भरो।।नव प्रात है, नई बात है,नई किरण हैं ज्योति नई।नई उमंगें, नई तरंगें,नई आस है, सांस नई।युग-युग के मुरझे सुमनों में, नई-नई मुस्कान भरो।उठो धरा के अमर सपूतों, पुन: नया निर्माण करो।