dharma sangrah

चटपटी कविता : नाना के गांव है जाना

Updated: बुधवार, 16 मई 2018 (15:20 IST)
- पद्मा चौगांवकर
 
नानाजी के गांव है जाना,
गांव खेत की सैर करेंगे।
शुद्ध हवा सांसों में भरकर,
छुप्पा-छुप्पी के खेल करेंगे।
नए-नए दोस्त हैं दोस्त बनाना,
छुट्टी में करने हंगामा,
नानाजी के गांव है जाना।
 
ताल में तैरेंगे जी भरकर,
खट्टे-मीठे बेर चखेंगे।
आम तले फिर गोट1 करेंगे,
गुड़-महेरी और अथाना2,
नानाजी के गांव है जाना।
 
मामा लाएंगे खरबूजे,
ककड़ी आम और तरबूजे।
मामी सेंक-सेंककर देंगी,
कमल गट्टे के बीज मखाना।
मुश्किल है वह स्वाद भुलाना,
नानाजी के गांव है जाना।
 
घेर के नानी को बैठेंगे,
रोज कहानी सुना करेंगे।
नानाजी से करें निहोरे,
बीते कल की बात बताना।
कैसा था वह वक्त पुराना,
नानाजी के गांव है जाना।
 
साभार - देवपुत्र

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस: जानिए इतिहास और इसका महत्व

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर निबंध: जानें भारत की आजादी का इतिहास और महत्व

तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

नई स्टडी: एंथोसायनिन से घट सकता है हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा, जानिए कैसे

अगला लेख