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बाल गीत : लपक लिए आम

poem on mango
लपकी ने लपक लिए,
थैले से आम।
 
अम्मा से बोली है,
आठ आम लूंगी मैं।
भैया को, दीदी को,
एक नहीं दूंगी मैं।
जो भी हो फिर चाहे,
इसका अंजाम।
 
न जाने किसने कल,
बीस आम खाए थे।
अम्मा ने दिन में जो,
फ्रिज में रखवाए थे।
शक के घेरे में था,
मेरा भी नाम।
 
नाना के आमों के,
बागों में जाऊंगी।
आमों संग नाचूंगी,
आमों संग गाऊंगी।
गर्मी की छुट्टी बस,
आमों के नाम।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें
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