बाल कविता : दादाजी ने मजा उड़ाया...
गुल्ली-टुल्ली लगीं झगड़ने,
पहले हम बैठेंगे।
कम्प्यूटर पर ऑनलाइन हम,
कार्टून देखेंगे।
गुल्ली-टुल्ली लगीं झगड़ने,
पहले हम जाएंगे।
चन्द्रयान पर बैठ चांद को,
हम छूकर आएंगे।
गुल्ली-टुल्ली लगीं झगड़ने,
पिज्जा-बर्गर लेंगे।
केशलेस पेमेंट नेट पर,
हम ही पहले देंगे।
इस झगड़े का दादाजी ने,
पूरा मजा उड़ाया।
एक पत्रिका में सुन्दर-सा,
बालगीत भिजवाया।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512)....
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