Fri, 3 Jul 2026

Notifications

  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. नन्ही दुनिया
  3. कविता
  4. Kids Poems For Grandparents

बाल कविता : दादी बोली

Kids Poems For Grandparents
जितनी ज्यादा बूढ़ी दादी,
दादा उससे ज्यादा।


 

 
दादी कहती 'मैं' शहजादी,
और दादा शहजादा।
 
दादी का यह गणित नातियों,
पोतों को ना भाता।
बूढ़े लोगों को क्यों मानें,
शहजादी-शहजादा।
 
दादी बोली, अरे बुढ़ापा,
नहीं उमर से आता।
जिनका तन-मन निर्मल होता,
वही युवा कहलाता।
 
ये भी पढ़ें
पुस्तक समीक्षा : ग़ज़ल कविता सप्तक (साझा संग्रह)