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Written By WD

गाँवों में फैल रहा है मोबाइल का बाजार

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहे हैं मोबाइल और लैंडलाइन कनेक्‍शंस

आईटी
भारतीय टेलीकॉम उद्योग की उन्‍नति‍ में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का भी बहुत बड़ा हाथ है, यद्यपि‍ ग्रामीण लोगों के लि‍ए मोबाइल का खर्च उठा पाना आज भी एक समस्‍या है।

एक नि‍जी कंपनी द्वारा कराए गए अध्‍ययन और इंफर्मेशन एंड कम्‍युनि‍केशन टैक्‍नोलॉजी पॉलि‍सी ऑर्गनाइजेशन के अनुसार कुल मोबाइल धारकों में से 27 प्रति‍शत गरीब ग्रामीण लोग हैं जबकि‍ सि‍र्फ 19 प्रति‍शत ही शहरी क्षेत्र के हैं। पाँच साल पहले हालत यह थी कि‍ भारतीय टेलीकॉम उद्योग में आई क्रांति‍ में ग्रामीण क्षेत्र शामि‍ल ही नहीं था। लेकि‍न अब तसवीर बदल चुकी है।

गरीब वर्ग के बीच मोबाइल और लैंडलाइन कनेक्‍शंस में 2006 से 2008 के बीच 131 प्रति‍शत की चमत्‍कारि‍क वृद्धि‍ हुई। इस वर्ग में मोबाइल कनेक्‍शन 40 प्रति‍शत और लेंडलाइन कनेक्‍शन 8 प्रति‍शत बढ़े हैं।

अध्‍ययन से पता चला है कि‍ भारत में सेकंड हैंड मोबाइल फोन का बहुत बड़ा बाजार है. अधि‍कांश ग्रामीण यूजर्स सेकंड हैंड मोबाइल पर औसतन 1500 रु. और नए मोबाइल पर 2300 रु. खर्च करते हैं।

हालाँकि‍, अध्‍ययनों के मुताबि‍क आज भी ग्रामीण लोग मोबाइल का उपयोग केवल बात करने के लि‍ए ही करते हैं, मोबाइल की अन्‍य सुवि‍धाओं का उपयोग अभी भी नगण्‍य है।
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