दुआओं से रोशन रही रात
शबे बराअत पर विशेष नमाज
रविवार की रात शबे-बराअत के मौके पर कई कार्यक्रम हुए। अल्लाह के बंदों ने खास नमाज पढ़ी, कब्रिस्तान जाकर पूर्वजों की कब्र पर फूल पेश किए और विशेष दुआएं कीं। इस मौके पर हर मुस्लिम इलाके जगमग थे। पुरुष जहां मस्जिदों में खास नमाज पढ़ रहे थे वहीं महिलाओं ने घरों पर इबादत की। ये सिलसिला ईशा की नमाज (रात 9 के लगभग) के बाद से फजर की नमाज (सुबह 5.30 बजे तक जारी रहा।) इस लंबी इबादत के बाद मुस्लिम धर्मावलंबी कब्रिस्तान गए और अपने पूर्वजों के लिए फातेहा पढ़ी और फूल पेश किए। शबे बराअत के मौके पर मौलाना अब्दुल हलीम कादरी ने कहा कि इस रात अल्लाह तआला नर्क से आजादी का प्रमाण पत्र देता है। लेकिन वे लोग वंचित रह जाते हैं जो कमजोरों पर जुल्म करते हैं, माता-पिता का आदर नहीं करते, शराब पीते हैं, सूद खाते हैं। हमें कमजोरों की मदद करने की शपथ लेनी चाहिए। इस्लाम सलामती का मजहब है। हम सब मिलकर आतंकवाद का मुकाबला करें तभी हमारे वतन से आतंकवाद खत्म होगा। शब-ए-बारात इस्लामी माह शाबान माह की 15 तारीख को मनाई जाती है। शब-ए-बारात की रात अल्लाह तआला अपने बंदो के साल भर के लिए रिज्क, जिंदगी और मौत का फैसला करता है। शब-ए-बारात के मौके पर मजारों और दरगाहों को सजाया गया था। अकीदतमंदों ने रवा, चने की दाल, मूंग की दाल आदि का हलवा बनाया और गरीबों में वितरित किया। इसके अलावा लोगों ने गरीबों को भोजन भी कराया। कब्रिस्तानों के आसपास हजारों की तादाद में भिखारी एकत्रित हुए। कब्रिस्तान आने वाले लोगों ने दिल खोलकर इन्हें खैरात बांटी।