ईरान का डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला, अमेरिका के लिए क्यों जरूरी है यह एयरबेस?
Iran Diego Garcia Missile Attack : ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया पर दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें से एक मिसाइल उड़ान के दौरान विफल हो गई, जबकि अमेरिकी युद्धपोत ने दूसरी मिसाइल को रोकने के लिए SM-3 इंटरसेप्टर दागा। यह मिडिल ईस्ट के बाहर ईरान का पहला हमला है।
कहां है डिएगो गार्सिया?
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीपसमूह का सबसे बड़ा द्वीप है, जो ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र का हिस्सा है और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 16वीं सदी में पुर्तगालियों द्वारा खोजे गए इस द्वीप को 1965 में मॉरीशस से अलग कर दिया गया, जिसके बाद यहां अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डा स्थापित करने के लिए स्थानीय आबादी को हटा दिया गया।
अमेरिका के लिए क्या है डिएगो गार्सिया का महत्व?
डिएगो गार्सिया इंडियन ओशन में स्थित एक अहम सैन्य ठिकाना है, जहां से अमेरिका और ब्रिटेन की संयुक्त सैन्य गतिविधियां संचालित होती रही हैं। यहां से अमेरिका के लिए दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका पर नजर रखना बेहद आसान है। यहां B2 बॉम्बर जैसे खतरनाक युद्ध विमान आसानी से उतर सकते हैं। कल ही ब्रिटेन ने अमेरिका को इस बेस के इस्तेमाल की इजाजत दी थी। यहां लगभग 4,000 अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य व नागरिक कर्मी तैनात हैं।
ईरान युद्ध में अमेरिका डिएगो गार्सिया और फेयरफोर्ड में मौजूद एयरफील्ड का इस्तेमाल करना चाहता, ताकि एक बहुत अस्थिर और खतरनाक सरकार के संभावित हमले को खत्म किया जा सके। यहां से वह स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को खुलवाने का प्रयास कर सकता है।
edited by : Nrapendra Gupta