IRIS Dena हमले के बाद भारत के खिलाफ साजिश! Pakistan ने चलाया झूठा अभियान, OSINT रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
अमेरिका-ईरान समुद्री टकराव के बाद भारत को बदनाम करने की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। खुफिया आकलनों में सामने आया है कि पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया नेटवर्क ने एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान चलाकर दुनिया के सामने यह झूठ फैलाने की कोशिश की कि भारत ने अमेरिकी सेना को ईरान के युद्धपोत की लोकेशन दी थी। ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena के डूबने के बाद शुरू हुआ यह ऑनलाइन हमला कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक पहुंच गया, जिसे सुरक्षा विशेषज्ञ हाइब्रिड इंफॉर्मेशन वॉरफेयर का हिस्सा मान रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस अभियान का एकमात्र उद्देश्य भारत और ईरान के पुराने द्विपक्षीय संबंधों में कड़वाहट घोलना था।
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने इस हमले को लेकर कहा कि यह कार्रवाई दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में भी ईरानी युद्धपोत सुरक्षित नहीं हैं। जारी किए गए पेरिस्कोप फुटेज में हमले का दृश्य भी दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक फ्रिगेट को आत्मसमर्पण का मौका नहीं मिला, हालांकि समुद्री युद्ध के नियमों के अनुसार यदि सामने वाला युद्धपोत आत्मसमर्पण का संकेत नहीं देता, तो बिना चेतावनी के भी हमला किया जा सकता है।
पाकिस्तान से जुड़ा दुष्प्रचार अभियान
जहाज डूबने की घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक नया नैरेटिव तेजी से फैलाया गया, जिसमें दावा किया गया कि भारत ने अमेरिकी सेना को ईरानी जहाज की लोकेशन से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दी थी। सुरक्षा विश्लेषकों ने इस दावे को भ्रामक बताया है। जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया पर #IndiaBetraysIran हैशटैग के साथ एक समन्वित अभियान चलाया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि भारत ने फ्रिगेट की लोकेशन लीक की, जिसके बाद अमेरिका ने हमला किया।
भारतीय ओपन सोर्स इंटेलिजेंस ग्रुप्स और थ्रेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म की जांच में पाया गया कि इस अभियान की शुरुआत 4 मार्च को @TacticalTribun नाम के अकाउंट से हुई पोस्ट से हुई थी। इस अकाउंट का यूजरनेम बार-बार बदलने का इतिहास रहा है, जिसे विशेषज्ञ संदिग्ध गतिविधि का संकेत मानते हैं।
पाकिस्तान आधारित नेटवर्क की बड़ी भूमिका
जांच में पता चला कि इस अभियान को बढ़ाने वाले लगभग 40 प्रतिशत अकाउंट पाकिस्तान से जुड़े थे। इसके अलावा ईरान समर्थक, मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई अकाउंट्स ने भी इस नैरेटिव को आगे बढ़ाया। रिपोर्ट में कहा गया कि यह अभियान सामान्य सोशल मीडिया प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि हाइब्रिड सूचना युद्ध की तरह चलाया गया, जिसमें असली यूजर्स और संगठित नेटवर्क दोनों का इस्तेमाल किया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक 100 से ज्यादा पहचाने गए अकाउंट्स से 500 से अधिक पोस्ट किए गए, जिनकी शुरुआती पहुंच 50 हजार से 1 लाख व्यूज तक रही। कुछ पोस्ट तो 9 लाख से ज्यादा इम्प्रेशन तक पहुंच गए, जिससे यह साफ है कि अभियान को जानबूझकर वायरल करने की कोशिश की गई।
हब-एंड-स्पोक मॉडल से फैलाया गया प्रोपेगेंडा
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस रिपोर्ट में कहा गया कि यह अभियान एक समन्वित हाइब्रिड डिसइन्फॉर्मेशन ऑपरेशन जैसा था। इसमें पहले एक मुख्य पोस्ट किया गया, फिर 3 से 6 घंटे के भीतर कई अकाउंट्स ने उसे दोहराया और बाद में 80 से ज्यादा अकाउंट्स ने कोट ट्वीट, रिप्लाई और हैशटैग के जरिए इसे फैलाया। जांच में यह भी सामने आया कि ईरानी झंडे के साथ युद्धपोत की तस्वीरें और पुराने नौसैनिक वीडियो जैसे भावनात्मक विजुअल कंटेंट टेक्स्ट पोस्ट की तुलना में ज्यादा तेजी से वायरल हुए, जिससे संकेत मिलता है कि लोगों की भावनाएं भड़काने की रणनीति के तहत यह अभियान चलाया गया। Edited by : Sudhir Sharma