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Last Modified: लंदन , रविवार, 28 दिसंबर 2025 (20:12 IST)

ब्रिटेन में भारतीय ने जीता नस्ली भेदभाव का केस, कोर्ट ने दिया 81 लाख रुपए मुआवजे का आदेश

An Indian man in Britain won a racial discrimination lawsuit against a restaurant manager
An Indian man won a racial discrimination case : ब्रिटेन के एक न्यायाधिकरण ने दक्षिण-पूर्वी लंदन में एक मशहूर कंपनी के फ्रेंचाइजी आउटलेट में अपने प्रबंधक पर गलत तरीके से बर्खास्तगी और नस्ली भेदभाव का आरोप लगाने वाले एक भारतीय व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाया और मुआवजे के रूप में लगभग 67000 पाउंड यानी लगभग 81 लाख रुपए देने का आदेश दिया है। यह फैसला कार्यस्थल पर नस्लीय दुर्व्यवहार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण जीत है। भारतीय व्यक्ति को उनके श्रीलंकाई मूल के बॉस ने 'गंदा' और 'गुलाम' कहा था और छुट्टी के अनुरोधों में भेदभाव किया।

खबरों के अनुसार, ब्रिटेन के एक न्यायाधिकरण ने दक्षिण-पूर्वी लंदन में एक मशहूर कंपनी के फ्रेंचाइजी आउटलेट में अपने प्रबंधक पर गलत तरीके से बर्खास्तगी और नस्ली भेदभाव का आरोप लगाने वाले एक भारतीय व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाया और मुआवजे के रूप में लगभग 67000 पाउंड यानी लगभग 81 लाख रुपए देने का आदेश दिया है।
तमिलनाडु के रहने वाले मधेश रविचंद्रन ने रोजगार न्यायाधिकरण की सुनवाई में कहा कि उनके श्रीलंकाई मूल के तमिल बास ने भेदभाव किया और उन्हें गुलाम जैसे शब्दों से संबोधित किया। जनवरी 2023 में रविचंद्रन ने वेस्ट विकहम स्थित केएफसी आउटलेट में काम शुरू किया।

कई महीनों तक समस्याओं का सामना करने के बाद जुलाई 2023 में मामला तब और बिगड़ गया जब उनके बास ने रविचंद्रन से शिफ्ट में अत्यधिक घंटे काम करवाने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। मधेश रविचंद्रन को उनके श्रीलंकाई मूल के बॉस ने 'गंदा' और 'गुलाम' कहा था और छुट्टी के अनुरोधों में भेदभाव किया।
न्यायाधीश पाल एबॉट ने नेक्सस फूड्स लिमिटेड के खिलाफ रविचंद्रन के गलत तरीके से बर्खास्तगी और नस्ली भेदभाव के दावे को सही ठहराया। फैसले में कहा गया, हमने तथ्यों के आधार पर पाया है कि शिकायतकर्ता के साथ अनुचित व्यवहार किया गया, उसकी छुट्टी का अनुरोध इसलिए अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि वह भारतीय था। रविचंद्रन ने सुनवाई में बताया कि उनके प्रबंधक ने उनके लिए 'गुलाम' और 'भारतीय धोखेबाज हैं', जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
गौरतलब है कि ब्रिटेन में आप्रवासियों में सबसे अधिक हैं भारत से जुड़े लोग यानी ऐसे लोग जो या तो ब्रिटेन की नागरिकता प्राप्त भारतीय हैं या यहां रह रहे भारतीय। जगगणना आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 साल में ब्रिटेन की आबादी में भारतीय और भारतीय मूल के लोगों का हिस्सा 2 प्रतिशत से बढ़कर ढाई प्रतिशत हो गया है।
Edited By : Chetan Gour
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