इंदौर की रीलबाज पुलिस की करतूत, TB के मरीज को ब्राउन शुगर तस्कर बताकर उठाया, जेल में मौत, 9 पुलिसवालों पर जांच
इंदौर में अपराध लगातार बढते जा रहे हैं, ट्रैफिक की हालत खराब है, शहर में लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं। कहीं किसी चौराहा पर पुलिस की तैनाती शून्य है। लेकिन विभाग द्वारा सोशल मीडिया में लगातार रील्स बनाई जा रही है। गाइडलाइन जारी की जा रही है। पुलिस के अधिकारी प्रवक्ता बनकर छोटी- मोटी कार्रवाई की खबरें व्हाट्सएप पर भेज रहे हैं। जमीन कहीं कोई पुलिस की मौजूदगी नहीं है, इंदौर पुलिस पूरी तरह से रीलबाज बनकर रह गई है।
इस बीच इंदौर पुलिस की करतूतों और लापरवाही के मामले भी सामने आ रहे हैं। एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें कानून की रखवाली करने वाली पुलिस ने झूठे आरोप में फंसा दिया, नतीजा यह हुआ कि इस बीमार युवक की जेल में ही जान चली गई।
दरअसल, इंदौर पुलिस ने टीबी के एक मरीज को ब्राउन शुगर के झूठे आरोप में फंसाकर घर से उठा लिया। बाद में जिला जेल में उस युवक की मौत हो गई। इस घटना के बाद युवक के परिजनों ने इंदौर पुलिस पर आरोप लगाए हैं। आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जिला न्यायालय ने एमआईजी थाने के 9 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच का आदेश दिए हैं। इस घटना के बाद इंदौर पुलिस के सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं।
मृतक के परिवार के ये आरोप
मृतक का नाम अजय सोनी है। उसके परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस ने ब्राउन शुगर के झूठे आरोप में उसे फंसाया। अजय टीबी का गंभीर मरीज था। अजय की जिला जेल में मौत हो गई। परिवार का कहना है कि युवक को बिना एफआईआर घर से उठाया गया, अवैध वसूली की गई और बाद में एक सोची-समझी साजिश के तहत झूठे एनडीपीएस केस में फंसाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला न्यायालय ने एमआईजी थाने के नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच का आदेश दे दिया है।
टीबी का मरीज था मृतक अजय
मामला दरअसल, 15 नवंबर 2024 का है। आरोप है कि इंदौर पुलिस ने अजय सोनी नामक युवक को उसके घर से जबरन उठाया। अजय टीबी का मरीज था और उसका वजन तेजी से घटकर लगभग 30 किलो रह गया था। उसकी बहन राधिका सोनी ने 23 मई 2025 को पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी। शिकायत में एमआईजी थाने के 9 पुलिसकर्मियों पर भारतीय दंड संहिता और एनडीपीएस एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए।
बिना एफआईआर घर में घुसकर उठा ले गए
पीड़िता ने बताया कि अजय को सरकारी टीबी अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद परिवार उसकी देखभाल कर रहा था। लेकिन 15 नवंबर 2024 को एमआईजी थाने के छह पुलिसकर्मी जिनमें प्रवीण सिंह अपने साथ एक युवक पोलार्ड को लेकर राधिका के घर पहुंचा। आरोप है कि उन्होंने बिना एफआईआर के घर में जबरन घुसकर तलाशी ली और अजय को अपने साथ ले गए। परिवार ने अजय की गंभीर बीमारी की जानकारी दी, लेकिन पुलिस ने एक न सुनी। इस दौरान अजय के पिता की एक्टिवा भी पुलिस ने अपने साथ ले गई।
अवैध वसूली का भी आरोप
पुलिस पर अवैध वसूली का भी आरोप है। बताया गया कि प्रवीण सिंह ने 40 हजार रुपए की मांग की थी। परिवार ने 25 हजार देकर एक्टिवा छुड़ाई। इसके बाद अजय को दिनभर थाने में रखा गया। रात को पुलिस ने अजय को सिंगापुर बिजनेस बिल्डिंग के पीछे 9.10 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ पकड़ने का झूठा दृश्य रचा। इसके लिए सभी नौ पुलिसकर्मी आरक्षक, प्रधान आरक्षक, चालक और सब-इंस्पेक्टर झूठे गवाह बनाए गए।
12 दिसंबर 2024 को अजय की मौत हुई
अगले दिन अजय को कोर्ट में पेश किया गया और जेल भेज दिया गया। जेल में उसकी स्थिति बिगड़ गई और 12 दिसंबर 2024 को उसकी मौत हो गई। परिवार को केंद्रीय जेल प्रशासन के माध्यम से सूचना दी गई। पीड़िता ने सीसीटीवी फुटेज स्क्रीनशॉट और पेनड्राइव अदालत में प्रस्तुत किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अजय को दोपहर में घर से उठाया गया था जबकि गिरफ्तारी रात को दिखाने का नाटक किया गया। जिला न्यायालय ने राधिका के कथन को लिखित रूप में दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Edited By: Navin Rangiyal