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ब्राह्मण से कैसे मुस्लिम बना बंगाल का ये ताकतवर नवाब?
Murshid Quli Khan
दरअसल, मुर्शिद कुली खान का जन्म 1660 में हिंदू ब्राह्णण परिवार में हुआ था। उसका बचपन का नाम सूर्य नारायण मिश्रा था, उसका जन्म डेक्कन में हुआ। इतिहासकार जदुनाथ की किताब के अनुसार वह 10 साल हिंदू धर्म में रहकर पला-बड़ा था। उनके घर के हालात ऐसे थे कि माता-पिता अपने बच्चों का लालन-पालन नहीं कर पा रहे थे। इसलिए उन्होंने सूर्य नारायण को एक मुगल सरदार हाजी शफी को बेच दिया। जी शफी की कोई औलाद नहीं थी।
मासीर अल-उमारा नामक पुस्तक भी इस तथ्य का समर्थन करती है कि करीब 10 साल की उम्र में उसे हाजी शफ़ी नाम के एक फारसी को बेच दिया गया। उस फारसी ने उसका धर्मांतरण करके उसे मुसलमान बनाया। इसके लिए उसका खतना भी किया गया था। खतना के बाद उसका नाम मोहम्मद हादी रखा गया था।
मुर्शिद कुली खान बहुत बुद्धिमान था। मुर्शिद कुली खान बंगाल का प्रथम स्वतंत्र सूबेदार था। मुगल बादशाह औरंगज़ेब द्वारा इस पद पर नियुक्त किया गया था। मुर्शिद ने बंगाल को एक स्थिर राजनीतिक शक्ति प्रदान की और उसे समृद्ध बनाने का प्रयास किया। मुर्शिद कुली ख़ाँ को 'दक्षिण का टोडरमल' भी कहा जाता है।
सूबेदार बनने के बाद ही उसने खुद को केंद्रीय नियंत्रण से मुक्त कर लिया और वह वह औरंगजेब को नजराने के रूप में बड़ी रकम भेजना रहता था। औरंगज़ेब के आदेश से मुर्शिद कुली खान अपनी राजधानी ढाका से मक़सूदाबाद ले आया और उसने उस नगर का नाम मुर्शिदाबाद रख दिया। कहते हैं कि उसके शासन में यह नियम था कि जो भी किसान अथवा जमींदार लगान न दे, उसको परिवार सहित मुस्लिम होना पड़ता था। जबकि मुस्लिमों को लगान की छूट थी।
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