Home tips | वास्तु टिप्स खास आपके लिए
भवन के उस भाग में जहाँ दो दीवारें मिलती हैं, खिड़कियाँ तथा रोशनदानों का निर्माण वहाँ न करवाएँ। यह अशुभकारी निर्माण होता है। जब कोई व्यक्ति मुख्यद्वार में प्रवेश करता है तो मुख्य द्वार से निकलने वाली चुम्बकीय तरंगें उसकी बुद्धि को प्रभावित करती हैं।
द्वार का सही दिशा में बनवाना आवश्यक है। प्रवेश द्वार सदैव अंदर की ओर खुलना चाहिए। प्रवेश द्वार दो पल्लों में हो तो बहुत ही उत्तम है। द्वार स्वतः ही खुलना व बंद होना नहीं चाहिए।
मुख्य द्वार के सम्मुख सीढ़ी, खम्भा, कीचड़ तथा मंन्दिर आदि नहीं होने चाहिए।
यदि बहुमंजिला इमारत है तो भूखंड पर पश्चिमी अथवा उत्तर दिशा की ओर अतिथि कक्ष का निर्माण उचित रहता है।
वास्तु दोष :- यदि भवन का पूर्व दिशा का भाग अन्य दिशाओं की अपेक्षा ऊँचा है तो अर्थ हानि, संतान अस्वस्थ एवं मंद बुद्धि वाली होगी।
निवारण :- भवन में टी. वी. का ऐन्टीना नैऋत्य कोण में लगा लें। जिसकी ऊँचाई भवन के पूर्वी एवं उत्तरी भाग की दीवारों से अधिक होनी चाहिए। यदि घर में टीवी नहीं है तो ऐन्टीना के स्थान पर लोहे का एक पाइप या डंडा लगाया जा सकता है। उपरोक्त दोनों उपायों के साथ-साथ भवन के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में ठोस वस्तुएँ एवं उत्तरी पूर्वी भाग में पोली व हल्की वस्तुएँ रख देनी चाहिए।
द्वार का सही दिशा में बनवाना आवश्यक है। प्रवेश द्वार सदैव अंदर की ओर खुलना चाहिए। प्रवेश द्वार दो पल्लों में हो तो बहुत ही उत्तम है। द्वार स्वतः ही खुलना व बंद होना नहीं चाहिए।
मुख्य द्वार के सम्मुख सीढ़ी, खम्भा, कीचड़ तथा मंन्दिर आदि नहीं होने चाहिए।
यदि बहुमंजिला इमारत है तो भूखंड पर पश्चिमी अथवा उत्तर दिशा की ओर अतिथि कक्ष का निर्माण उचित रहता है।
वास्तु दोष :- यदि भवन का पूर्व दिशा का भाग अन्य दिशाओं की अपेक्षा ऊँचा है तो अर्थ हानि, संतान अस्वस्थ एवं मंद बुद्धि वाली होगी।
निवारण :- भवन में टी. वी. का ऐन्टीना नैऋत्य कोण में लगा लें। जिसकी ऊँचाई भवन के पूर्वी एवं उत्तरी भाग की दीवारों से अधिक होनी चाहिए। यदि घर में टीवी नहीं है तो ऐन्टीना के स्थान पर लोहे का एक पाइप या डंडा लगाया जा सकता है। उपरोक्त दोनों उपायों के साथ-साथ भवन के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में ठोस वस्तुएँ एवं उत्तरी पूर्वी भाग में पोली व हल्की वस्तुएँ रख देनी चाहिए।

