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Poem | शरद चाँदनी की छाँव तले

शरद चाँदनी
ND
शहदीया रातों में
दूध धुली चाँदनी
फैलती है

तब
अक्सर पुकारता है
मेरा मन

कि आओ,
पास बैठों
चाँद पर कुछ बात करें।

शरद चाँदनी की छाँव तले
आओ कुछ देर साथ चलें।
लेखक के बारे में
स्मृति आदित्य