Poem | शरद चाँदनी की छाँव तले ND शहदीया रातों में दूध धुली चाँदनी फैलती है तब अक्सर पुकारता है मेरा मन कि आओ, पास बैठों चाँद पर कुछ बात करें। शरद चाँदनी की छाँव तले आओ कुछ देर साथ चलें। लेखक के बारे में स्मृति आदित्य हमारे साथ WhatsApp पर जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें हमारे साथ Telegram पर जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें