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Written By WD

भ्रष्टाचार की लहर

आशुतोष शर्मा

कविता
ND


लहर चली लहर चली,
भ्रष्टाचार की लहर चली।
साधु संतों से लेकर,
देशभक्तों में एक लहर चली।
कालेधन से लेकर,
लोकपाल की एक लहर चली।
भगवा से लेकर,
खादी कुर्ते तक एक लहर चली।
भ्रष्टाचार मिटाने की,
आग सुलग चली।
पब्लिसिटी से लेकर वोटबैंक में,
आम जनता फिसल चली।
भ्रष्टाचार मिटाना है तो,
आम जनता में सुधार लाना है।
तभी मिटेगा भ्रष्टाचार
और हम गर्व से कहेंगे,
'भारत देश महान'
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WD