तुम्हारे लिए सूली पर चढ़े परमात्मा ईसा बनकर तुम्हारे लिए वन-वन भटके परमात्मा राम बनकर तुम्हारे लिए लीलायें की परमात्मा ने कृष्ण बनकर तुम्हारे लिए बुद्ध, महावीर नानक, पैगम्बर बने परमात्मा पर तुम रहे निर मनके ही।
मरे हुए धर्मों के पगलाये हुए अनुयायी न जाने कितने मनुष्यों प्राणियों की हत्यायें और करेंगे न जाने कितने मनुष्यों प्राणियों की हत्यायें और करेंगे
न जाने कब तक निरीह पशु होते रहेंगे कुर्बानी बलि के नाम पर कत्ल सड़े-गले विचारों-संस्कारों आडंबरों के नाम पर कब तक रोती रहेगी मानव सभ्यता
न जाने कब तक चलता रहेगा धर्म, मोक्ष, स्वर्ग का धंधा योग भोग-रोग, आयुर्वेद क्या धन्वन्तरी की बोली लगाते बाबा कब तक लुटते रहेंगे ये कम अक्ल लोग।