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नए साल की शुभकामनाएँ।

- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

नया साल
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खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को,
कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को,
नए साल की शुभकामनाएँ।

गाँवों के गीतों को, बैलों की चाल को,
करघे के कोल्हू को, मछुए के जाल को,
नए साल की शुभकामनाएँ।

इस पकती रोटी को, बच्चों के शोर को,
चौके की गुनगुन को,चूल्हे की भोर को,
नए साल की शुभकामनाएँ।

वीराने जंगल को, तारों को, रात को,
ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को,
नए साल की शुभकामनाएँ।

इस चलती आँधी में, हर बिखरे बाल को,
सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख्याल को,
नए साल की शुभकामनाएँ।

कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को,
हर नन्ही याद को, हर छोटी भूल को,
नए साल की शुभकामनाएँ।
लेखक के बारे में
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