Hindi Love Poem | तुम्हारे पास चली आई हूं
ज्योति जैन
ND
श्ारद की चांदनी की खामोश चादर।
पूनम के चांद की ज्योति
देखती है तुम्हें,
तुम्हारी खिड़की से
अनजाने ही, तुम्हारे अधरों पर,
फिर आती है,
वही, चिर परिचित
लेकिन यका-कदा
आने वाली मुस्कुराहट
तब, चारों ओर महकी
रातरानी
उग आती है सांसों में।
ऐसे में,
क्या तुम्हें नहीं लगता?
चंद्रकिरण्ा की डोर थामे
चुपके से मैं,
तुम्हारे पास
चली आई हूं?
नववधू की तरह लजाती
आतुर, आने को?

