चांद के पास जो सितारा है
ज्योति जैन
दूज के चांद के पासटिमटिमाते तारे-साअस्तित्व मेरा।रोशनी से उसकीप्रदीप्त होता वजूद।पर खुश हूंइस अस्तित्व से,जो जुदा नहीं चांद से।खुश्ा हूंउसकी निकटता से।और इस बात सेकि शीतलता चांद कीसमेट लेती हैतमाम उष्मामेरे अस्तित्व की,मौका नहीं देती,कभी जलने का।चांदनी बरसाते चांद के पासअस्तित्व मुझ उग्र तारे का।