biodatamaker
✕

हिन्दी कविता : रोक दो टोक दो

Updated: बुधवार, 28 अप्रैल 2021 (14:06 IST)
रोक दो, टोक दो हर उस इंसान को 
घूम रहा गलियों में, जो बिना लगाए मास्क को
झिझक का बंधन तोड़ दो
स्टेट्‍स को छोड़ दो 
रोक दो टोक दो
बचाओ अपने आपको, अपने आसपास वालों को
दौर कठिन है संभल जाओ
जीवन का आधार, बना लो मास्क को
रोक दो टोक दो
नारी हो, पुरुष हो, बच्चा हो, बूढ़ा हो,
ना करो लिहाज, हो जाए तो होने दो शर्म से लाल 
पहनेगा मास्क तो बचेगी जिंदगी
उसे रोक, दो टोक दो,
गांव की पगडंडियों पर, शहर की सड़कों पर, 
हाईवे पर चलने वाले हर उस शख्स को,
कह दो! भाई मेरे, मास्क लगा लें, रख ले दो गज दूरी 
मास्क है अब हम सबके लिए जरूरी
रोक दो, टोक दो। 
लेखक के बारे में
आरती चित्तौडा

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

वाणी साहित्य उत्सव का आगाज, पहले दिन युद्ध, स्त्री विमर्श और एआई के दौर में लेखन पर हुआ मंथन

वर्ल्ड स्ट्रोक डे: स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही लें चिकित्सकीय सहायता, हर मिनट है कीमती

बौखलाए नेताओं की बेरहमी का ये सबसे निर्दयी उदाहरण है, 200 पेड़ों से हजारों परिंदों के आशियाने उजाड़कर मेट्रो चलाएंगे

करवा चौथ से पहले चेहरे पर कैसे लाएं नेचुरल ग्लो? घर पर अपनाएं ये आसान ब्यूटी टिप्स

विजय सिंह चौहान की आठ लघुकथाएं

अगला लेख