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Last Updated : मंगलवार, 21 मई 2024 (13:54 IST)

चाय न हो तो राष्ट्रीय अखबार अधूरे हैं

InternationalTeaDay
tea poem 
  
चाय 
देश के लिए एक संभावना है 
 
चाय न हो तो राष्ट्रीय अखबार अधूरे हैं
 
सरकार के खिलाफ उफनता विमर्श है चाय
नेताओं को दी गईं गालियों का स्वाद है
 
संभावित प्रेम
बातों की गुंजाइश है चाय
प्यार करने और साथ रहने का बहाना है
 
जहां तक ज़िंदगी की बात है
जब तुम मेरे लिए कम चीनी वाली चाय बनाती हो
तो मैं समझ जाता हूं 
कि सबकुछ ठीक नहीं है
 
चाय मिले तो सहूलियत 
न मिले तो दुश्वारियां हैं
जिंदगी की तलब है चाय
 
चाय अदरक वाली कविता है
 
अजनबी से मुलाकात है 
एक बार मिलने पर
फिर से मिलने का वादा देती है 
 
चाय हो तो अकेला आदमी उतना अकेला नहीं
जितना चाय के बगैर नज़र आता है
चाय पीता हुआ आदमी
पूरा आदमी है
 
चाय महज चाय नहीं
मिलने और बिछड़ने से पहले 
एक मुलाकात है चाय
 
क्या किसी दिन
मुझसे चाय पर मिलोगी तुम?
 
 
#औघटघाट 
 
#चाय 
 
#InternationalTeaDay

लेखक के बारे में
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्‍म में मास्‍टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्‍कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्‍ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्‍हें फिल्‍ड रिपोर्टिंग का अच्‍छा-खासा अनुभव है। उन्‍होंने अखबार.... और पढ़ें
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