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Written By WD Feature Desk
Last Updated : गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026 (10:40 IST)

Guru Golwalkar Jayanti: गुरु गोलवलकर कौन थे? जानें 7 अनसुने तथ्य

माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरु गोलवलकर) का फोटो
Guru Golwalkar: गुरु गोलवलकर का पूरा नाम माधव सदाशिव गोलवलकर था, जो भारतीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के दूसरे सरसंघचालक थे और एक प्रमुख हिन्दू राष्ट्रीयतावादी विचारक थे। उनका जीवन और कार्य भारतीय राजनीति और समाज पर गहरे प्रभाव डालने वाला था। वे भारतीय संस्कृति, हिन्दू धर्म, और राष्ट्रीयता के सिद्धांतों के पक्षधर थे और संघ के माध्यम से उन्होंने भारतीय समाज को एकजुट करने के लिए कार्य किया। माधव सदाशिव गोलवलक का जन्म 19 फरवरी 1906 को हुआ था।ALSO READ: Shivaji Jayanti Massages: छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर भेजें ये 10 प्रेरणादायक शुभकामना संदेश
 
  1. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक
  2. 'बंच ऑफ थॉट्स' (Bunch of Thoughts)
  3. हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा
  4. संघ के विचार और कार्य
  5. आत्मनिर्भरता और स्वदेशी विचार
  6. समाज में सुधार की दिशा में कार्य
  7. गुरु गोलवलकर का प्रभाव
 

गुरु गोलवलकर के प्रमुख योगदान और विचार

 

1. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक

गोलवलकर ने 1940 में डॉ. के. बी. हेडगेवार के बाद RSS के दूसरे सरसंघचालक के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने संघ को एक सशक्त और प्रभावशाली संगठन बनाने के लिए कार्य किया और इसके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में संघ ने भारतीय समाज में अपनी पहचान बनाई और हिन्दू जागरण के लिए सक्रिय रूप से काम किया।
 

2. 'बंच ऑफ थॉट्स' (Bunch of Thoughts)

गोलवलकर का सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली कार्य उनकी किताब 'बंच ऑफ थॉट्स' है। इस किताब में उन्होंने भारतीय समाज और संस्कृति के विषय में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को प्रमुखता दी और भारतीय समाज के विकास के लिए राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक पुनर्निर्माण, और हिन्दू धर्म के महत्व को बताया।
 

3. हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा

गोलवलकर के विचारों में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना और हिन्दू संस्कृति की रक्षा को प्राथमिकता दी गई। उनका मानना था कि भारत का असली स्वरूप हिन्दू संस्कृति और जीवन पद्धति में निहित है। वे यह मानते थे कि भारत को एक 'हिन्दू राष्ट्र' के रूप में पुनर्निर्मित करना चाहिए, जिसमें हिन्दू संस्कृति, सभ्यता और जीवन मूल्य प्रमुख हों।
 

4. संघ के विचार और कार्य

गोलवलकर ने संघ के मूल सिद्धांतों और विचारों को और अधिक स्पष्ट किया। वे मानते थे कि भारतीय समाज में सुधार और एकता लाने के लिए हिन्दू समाज को जागरूक और संगठित किया जाना चाहिए। उन्होंने भारत में हिन्दू एकता और राष्ट्रीयता के विचार को फैलाया और संघ के कार्यकर्ताओं को देशभक्ति, समाजसेवा, और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया।
 

5. आत्मनिर्भरता और स्वदेशी विचार

गोलवलकर ने स्वदेशी विचारों को बढ़ावा दिया और विदेशी प्रभावों के विरोध में भारतीय समाज को जागरूक किया। उनका मानना था कि भारत को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी होना चाहिए और विदेशी सांस्कृतिक प्रभावों से बचना चाहिए।
 

6. समाज में सुधार की दिशा में कार्य

गोलवलकर ने जातिवाद और अन्य सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने समाज में एकता और समानता की ओर बढ़ने के लिए संघ के कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया। हालांकि, उनके दृष्टिकोण में कुछ आलोचना भी हुई, विशेषकर उनके विचारों को लेकर जो कि अन्य धर्मों और अल्पसंख्यकों के प्रति कठोर थे।

 

7. गुरु गोलवलकर का प्रभाव

 
गोलवलकर के विचारों ने भारतीय समाज और राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। उनके नेतृत्व में RSS एक शक्तिशाली संगठन बन गया और हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को मजबूत किया। हालांकि, उनके विचारों को लेकर विवाद भी रहे हैं, खासकर उनके राष्ट्रवादी दृष्टिकोण और समाज में एक विशेष प्रकार की सांस्कृतिक एकता की आवश्यकता को लेकर।
 
उनके योगदान को समझने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि उन्होंने भारतीय समाज में धर्म, राष्ट्रीयता, और सांस्कृतिक पहचान को एक केंद्रीय स्थान दिया। गोलवलकर का प्रभाव आज भी भारतीय राजनीति और समाज में महसूस किया जाता है।
 
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