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Written By WD Feature Desk
Last Updated : शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026 (10:22 IST)

सरोजिनी नायडू: भारत की पहली महिला राज्यपाल, जानें 10 रोचक बातें

भारत कोकिला सरोजिनी नायडू का फोटो
About Sarojini Naidus Biography: सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। उनका जीवन साहित्य, राजनीति और समाज सेवा का अद्भुत संगम था। सरोजिनी नायडू, जिन्हें अपनी मधुर आवाज और कविताओं के कारण 'भारत कोकिला' (The Nightingale of India) कहा जाता है, न केवल एक महान कवयित्री थीं, बल्कि एक सशक्त स्वतंत्रता सेनानी और कुशल राजनीतिज्ञ भी थीं, स्वतंत्र भारत की पहली महिला राज्यपाल बनी थीं।
 

यहां उनके जीवन से जुड़ी 10 रोचक बातें दी गई हैं जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती हैं...

 
  • सरोजिनी नायडू के बारे में रोचक तथ्य
  • प्रथम महिला राज्यपाल
  • विलक्षण प्रतिभा
  • जन्मदिन और राष्ट्रीय महिला दिवस
  • हैदराबाद के निजाम का संरक्षण
  • कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष
  • गांधी जी के साथ सक्रियता
  • बहुभाषी व्यक्तित्व
  • साहित्यिक योगदान
  • महिला अधिकारों की पैरोकार
  • अतरराष्ट्रीय ख्याति
  • मशहूर किस्सा
 

सरोजिनी नायडू के बारे में 10 रोचक तथ्य

 

प्रथम महिला राज्यपाल

स्वतंत्रता के बाद, वह उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) की राज्यपाल बनीं। वह स्वतंत्र भारत में राज्यपाल का पद संभालने वाली पहली महिला थीं।
 

विलक्षण प्रतिभा

उन्होंने महज 12 साल की उम्र में मद्रास विश्वविद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली थी और अपनी साहित्यिक प्रतिभा से सबको हैरान कर दिया था।
 

जन्मदिन और राष्ट्रीय महिला दिवस

उनके सम्मान में, उनकी जयंती यानी 13 फरवरी को भारत में हर साल 'राष्ट्रीय महिला दिवस' के रूप में मनाया जाता है। उनका निधन 2 मार्च 1949, लखनऊ में हुआ था।
 

हैदराबाद के निजाम का संरक्षण

उनकी कविता 'द लेडी ऑफ द लेक' से प्रभावित होकर हैदराबाद के निजाम ने उन्हें विदेश में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति दी थी, जिसके बाद वह केंब्रिज यूनिवर्सिटी गईं।
 

कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष

1925 के कानपुर अधिवेशन में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। वह इस पद को संभालने वाली पहली भारतीय महिला थीं।
 

गांधी जी के साथ सक्रियता

वह महात्मा गांधी की घनिष्ठ अनुयायी थीं। 1930 के दांडी मार्च और 'नमक सत्याग्रह' के दौरान उन्होंने गांधी जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और जेल भी गईं।
 

बहुभाषी व्यक्तित्व

सरोजिनी नायडू को हिंदी, अंग्रेजी, तेलुगु, बंगाली, गुजराती और फारसी जैसी कई भाषाओं का गहरा ज्ञान था।
 

साहित्यिक योगदान

उनकी रचनाएं जैसे 'द गोल्डन थ्रेशोल्ड' (The Golden Threshold) और 'द बर्ड ऑफ टाइम' आज भी साहित्य जगत में मील का पत्थर मानी जाती हैं।
 

महिला अधिकारों की पैरोकार

उन्होंने भारत में 'विमेंस इंडियन एसोसिएशन' (WIA) की स्थापना में मदद की और महिलाओं के मताधिकार के लिए आवाज उठाई।
 

अंतरराष्ट्रीय ख्याति

उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से अमेरिका और यूरोप के कई देशों में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पक्ष में व्याख्यान दिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पक्ष रखा।
 

मशहूर किस्सा

सरोजिनी नायडू अपनी हाजिरजवाबी के लिए जानी जाती थीं। वह अक्सर गांधी जी को प्यार से "मिकी माउस" कहकर बुलाती थीं, जो उनके और गांधी जी के बीच के गहरे और सहज रिश्तों को दर्शाता है।
 
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