उनकी नादानी बेमिसाल
अपनी जेब में लिए घूम रहे हैं भूचाल वे।
विस्फोट को अब तक रहे हैं टाल वे।।
खुशफहमी है उन्हें कि अपनी भाषण कला से,
कर देंगे एक दिन सत्ता पक्ष को बेहाल वे।।
अव्यवस्थाओं के घनघोर अंधेरों में बस,
समझ रहे हैं खुद को जलती मशाल वे।।
अपने बचकाने आत्मविश्वास से क्यों बार बार।
बनते रहे हैं अनर्गल बयानों की मिसाल वे।।
अपने सहधर्मी बयानबाज दिल्लीवाल के साथ।
हजम नहीं कर सकते मोदी का कोई कमाल वे।।
व्हाट्सएप पर जोकों/ शगूफों के लिए
नित नए मसाले दे रहे हैं फ़िलहाल वे।।
अपनी नादान हरकतों से गंभीर पार्टीजनों के लिए।
बन न जाएं एक दिन जी का जंजाल वे।।
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय....
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